
धनबाद में सरेआम 4 लोगों को भून डाला था, शरीर में मिली थीं 17 गोलियां; नीरज सिंह हत्याकांड की पूरी कहानी
नीरज सिंह हत्याकांड में कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को साक्ष्य के आभाव में बरी किया है।
धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर और कांग्रेस नेता नीरज सिंह सहित चार लोगों की हत्या में उनके चचेरे भाई व झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी 10 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने बुधवार को बरी कर दिया। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दुर्गेशचंद्र अवस्थी ने धनबाद के सबसे चर्चित हत्याकांड में अपना अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन आरोपियों के खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं कर सका। फैसले से ठीक पहले शाम करीब पौने चार बजे संजीव को एंबुलेंस में स्ट्रेचर से कोर्ट लाया गया। कोर्ट ने कुल 592 पन्नों में संजीव सिंह सहित अन्य 10 आरोपियों की रिहाई की दास्तान लिखी।
नीरज सिंह के शरीर से मिली थीं 17 गोलियां
नीरज सिंह व अन्य पर चार शूटरों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। पोस्टमार्टम में नीरज के शरीर से 17, फार्च्यूनर चला रहे घल्टू के शरीर से तीन, पीछे बैठे अशोक और मुन्ना के शरीर से दो-दो गोलियां निकाली गई थीं। कई गोलियां नीरज के शरीर के आर-पार हो गई थीं। शूटरों ने दोनों हाथ में ब्रेटा पिस्टल ले रखी थी। हर पिस्टल में 14-14 गोलियों से भरी मैगजीन लगी थी।
21 मार्च 2017 की शाम सात बजे स्टीलगेट के पास नीरज सिंह, उनके पीए अशोक यादव, बॉडीगार्ड मुन्ना तिवारी और ड्राइवर चंद्र प्रकाश महतो उर्फ घल्टू महतो को अपराधियों ने गोलियों से भून दिया गया था। मामले में नीरज सिंह के अनुज अभिषेक सिंह की लिखित शिकायत पर संजीव सिंह, उनके भाई सिद्धार्थ गौतम उर्फ मनीष सिंह, जैनेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, झरिया के गया सिंह (अभी मृत) और महंत पांडेय को नामजद व अन्य अज्ञात को आरोपी बनाया गया था। जांच के बाद पुलिस ने इस कांड में 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मनीष सिंह व महंत पांडेय के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने पर पुलिस ने उनके खिलाफ चार्जशीट नहीं सौंपी। पुलिस ने यूपी के शूटर अमन सिंह को भी आरोपी बनाया था। तीन दिसंबर 2023 को धनबाद जेल में उसकी हत्या हो गई। 12वें आरोपी प्रयागराज के रिंकू सिंह के खिलाफ चौथी चार्जशीट सौंपी गई थी। उस केस का ट्रायल अलग से चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली बेल संजीव के लिए बनी संजीवनी
स्ट्रेचर पर कोर्ट पहुंचे संजीव बीमार नजर आए। फैसले के बाद उन्हें एट लेन स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। संजीव सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद दिल्ली में इलाज करा रहे थे।संजीव सिंह के जमानत आदेश में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी ने भी उनके बरी होने में संजीवनी का काम किया। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के फैसले में लिखा था कि संजीव सिंह का मामला भी जैनेंद्र सिंह उर्फ पिंटू की ही तरह है। किसी स्वतंत्र गवाह ने संजीव सिंह की घटनास्थल पर मौजूदगी की बात नहीं कही। इसका भी फायदा संजीव सिंह को इस केस में बरी होने में मिला।





