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फाइलेरिया से बचने का एकमात्र उपाय फाइलेरिया रोधी दवा सेवन : डीडीसी

देवघर,प्रतिनिधि। राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन के तहत 10 से 25 फरवरी तक आयोजित फायलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 2024 के सफल क्रियान्वयन के दूसरे दिन...

फाइलेरिया से बचने का एकमात्र उपाय फाइलेरिया रोधी दवा सेवन : डीडीसी
हिन्दुस्तान टीम,देवघरMon, 26 Feb 2024 11:01 PM
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देवघर,प्रतिनिधि।
राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन के तहत 10 से 25 फरवरी तक आयोजित फायलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 2024 के सफल क्रियान्वयन के दूसरे दिन सोमवार को जिला स्तरीय समन्वय समिति सह जिला टास्क फोर्स की बैठक विकास भवन सभागार में डीडीसी नवीन कुमार की अध्यक्षता में की गई। मौके पर डीडीसी द्वारा फायलेरिया उन्मूलन को लेकर किए जा रहे कार्यों की बिन्दुवार समीक्षा करते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों एवं चिकित्सकों के टीम को उचित दिशा निर्देश दिया गया। डीडीसी ने जानकारी देते हुए कहा कि जिस तरह कैंसर एक लाइलाज बीमारी है, ठीक उसी तरह फाइलेरिया या हाथीपांव भी लाइलाज बीमारी है। फाइलेरिया से बचने के लिए एकमात्र उपाय फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करना है। फाईलेरिया के लक्षण उभरने में कम से कम 5 से 15 साल तक का समय लगता है। लक्षण उभरने के पूर्व इसकी पहचान मुश्किल है। इसकी जांच के लिए रात में रक्त के नमूने लिए जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार पांच से सात साल तक फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करता है, तो उसके शरीर में फाइलेरिया के परजीवियों का प्रजनन लगभग रुक जाता है। यदि सभी व्यक्ति को डीईसी एवं एलबेंडाजोल की एकल खुराक वर्ष में एक बार खिलायी जाए तो 80 से 90 प्रतिशत तक इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है, और फाइलेरिया होने की संभावना को कम किया जा सकता है। कहा कि फाइलेरिया के उपचार और दवा खाने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्राम गोष्ठी, रात्रि चौपाल आदि का आयोजन किया जाए। ताकि अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलायी जा सके। फाइलेरिया एक गंभीर रोग है, जो शरीर को अपंग और कुरूप करने वाली बीमारी है। इसका लक्षण लंबे अरसे बाद दिखाई पड़ता है और धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित कर मूल रूप लेते हुए शरीर को क्षति पहुंचाने का कार्य करता है।

मॉपअप राउंड में 29 फरवरी तक छूटे हुए कुल 97 गांवों में लोगों को खिलाई जाएगी दवा :-

डीडीसी ने कहा कि 5 वर्ष से 9 वर्ष के बच्चों को आयरन फॉलिक की गुलाबी गोली एवं 10 वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों को आयरन फॉलिक की नीली गोली खिलायी जानी है। साथ ही ड्राप आउट बच्चों के सबंध में उन्होंने सबंधित एवं सहयोगी विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी आपस में समन्वय स्थापित करते हुए उपरोक्त बच्चों को शत प्रतिशत अनीमिया की गोली खिलाया जाना सुनिश्चित करें। साथ ही मोपअप राउंड के तहत 29 फरवरी तक छुटे हुए कुल 97 गांवो में लोगों को दवाई खिलाई जाएगी। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि जसीडीह सीएचसी अंतर्गत 93.38 प्रतिशत, मोहनपुर 92.65 प्रतिशत, सारवां 91.85 प्रतिशत, सारठ 92.69, पालोजोरी 93.27, मधुपुर अरबन 94.11, मधुपुर ग्रामीण 93.89, करौ 92.47, देपीपुर 94.15, देवघर अरबन 96.41प्रतिशत एवं कुल 93.30 प्रतिशत दवाई अब तक खिलाई गई है। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ.रंजन सिन्हा, डब्लूएचओ के अधिकारी, एम्स देवघर के अधिकारी, सभी प्रखंड के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी, जिला भीभीडी सलाहकार डॉ. गणेश कुमार सहित संबंधित विभाग के अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।

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