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Hindi News झारखंड देवघरगायत्री को कहा गया है कलियुग का पारस, कामधेनु व कल्पवृक्ष : उमाकांत

गायत्री को कहा गया है कलियुग का पारस, कामधेनु व कल्पवृक्ष : उमाकांत

- गायत्री शक्तिपीठ में हवन-पूजन के साथ गायत्री जयंती संपन्न अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में रविवार को डाबरग्राम स्थित...

- गायत्री शक्तिपीठ में हवन-पूजन के साथ गायत्री जयंती संपन्न अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में रविवार को डाबरग्राम स्थित...
1/ 3- गायत्री शक्तिपीठ में हवन-पूजन के साथ गायत्री जयंती संपन्न अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में रविवार को डाबरग्राम स्थित...
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गायत्री को कहा गया है कलियुग का पारस, कामधेनु व कल्पवृक्ष : उमाकांत
हिन्दुस्तान टीम,देवघरSun, 16 Jun 2024 04:46 PM
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देवघर,प्रतिनिधि। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में रविवार को डाबरग्राम स्थित गायत्री शक्तिपीठ मंदिर में हवन- पूजन कार्यक्रम के साथ गायत्री जयंती मनायी गई। इस दौरान गंगा अवतरण, परमपूज्य गुरुदेव युगद्रष्टा पंडित श्रीराम शर्माजी का महाप्रयाण पावन दिवस को लेकर सामूहिक रूप से गायत्री परिवार के परिजनों तथा सनातनी श्रद्धालुओं ने गुरु, गायत्री, गंगा तथा सर्वदेव का विशेष पूजन आचार्य गौतम विश्वकर्मा के सानिध्य में किया। इसके साथ ही गायत्री मंदिर स्थित यज्ञशाला हवन कुंड में प्रज्वलित साक्षात अग्निदेव को आत्मकल्याण, विश्व-कल्याण के लिए गायत्री महामंत्र,गंगा गायत्री महामंत्र, मृत्युंजय महामंत्र, महाकाल गायत्री मंत्र से आहूतियां समर्पित की गई। मौके पर मुख्य ट्रस्टी महेंद्र प्रसाद यादव ने शांतिकुंज के संदेश को पढ़ कर सबों को सुनाया। इसके साथ ही गायत्री जयंती के आध्यात्मिक दिवस के महत्व को आत्मसात कराते हुए जिला संगठन प्रबंधन समन्वयक उमाकान्त राय ने कहा कि दृश्य भगवती गंगा और अदृश्य वेदमाता गायत्री कई दृष्टियों में साम्य है। गंगा शरीर को पवित्र करती है और गायत्री आत्मा को। गंगा मृतकों को तारती है, गायत्री जीवितों को। गायत्री को कलियुग का पारस, कामधेनु तथा कल्पवृक्ष कहा गया है। गायत्री जयंती के पूर्व दिवस 15 जून प्रातः 6 बजे से सायं 6 बजे तक अखंड गायत्री महामंत्र का जप किया गया। चूंकि जप से मंत्र जाग्रत होता है तथा हवन से मंत्र में प्राण आते हैं। प्राणी की मनोकामनाएं पूरी होती है तथा सिद्ध भी मिलती है। इस दौरान जन्मदिन, अन्नप्रासन, दीक्षा तथा पुंसवन संस्कार नि:शुल्क संपन्न हुआ। उसके बाद वेदमाता गायत्री के महाआरती से अनुष्ठान का समापन किया गया। अंत में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। अनुष्ठान को सफल बनाने में मुख्य ट्रस्टी महेंद्र प्रसाद यादव, जिला संगठन समन्वयक उमाकान्त राय, उदय शंकर सिंह, हासो राम, प्रसाद यादव, शशिभूषण सिन्हा, बबिता सिंह, निर्मला राय, निशा कुमारी, कांति देवी सहित अन्य का सराहनीय योगदान रहा।

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