
जहां प्रेम और सेवा भाव, वहीं आत्मा का कल्याण
देवघर में आयोजित जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र में संत विज्ञान देव जी महाराज ने प्रेम, सत्य, श्रद्धा और सेवा का महत्व बताया। उन्होंने युवाओं को परिस्थितियों का स्वामी बनने का संदेश दिया। यह...
देवघर। ब्रह्म विद्या विहंगम योग के राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश यात्रा के क्रम में शांति कोठी परिसर में आयोजित जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र में सुपूज्य संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि जहां प्रेम, सत्य, श्रद्धा, समर्पण और सेवा भाव है, वहीं आत्मा का कल्याण और परमात्मा का प्रकाश है। महाराज जी ने भारतीय संस्कृति को विश्ववारा बताते हुए कहा कि धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की चतुःसूत्री इसका आधार है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि युवा वही है जो परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका स्वामी हो और लक्ष्य से न डिगे। करीब ढाई घंटे तक प्रवाहित दिव्य वाणी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति और विहंगम योग की साधना ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। आयोजकों ने बताया कि यह संकल्प यात्रा 29 जून को कश्मीर से शुरू हुई थी और विभिन्न राज्यों से होते हुए झारखंड पहुंची है। आगामी 25-26 नवंबर 2025 को वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर में 25,000 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ का भव्य आयोजन होगा। मौके पर महिला प्रभारी अनिता कुमारी, प्रधान संयोजक निवास मंडल, जिला संयोजक प्रदीप कुमार, जिला प्रचार मंत्री महेंद्र प्रसाद राणा, पूर्व कृषि मंत्री रणधीर सिंह, संतोष साहनी, पूनम सिंह, सुकदेव यादव, जितेन मंडल, दिलीप ठाकुर सहित काफी संख्या में अनुयायियों आयोजन में हिस्सा लिया।

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