शहरवासियों को फिर सताने लगी पानी की चिंता
देवघर में गर्मी के मौसम की दस्तक के साथ ही पानी की किल्लत की चिंता बढ़ गई है। शहर के अधिकांश हिस्से जल संकट का सामना कर रहे हैं। नियमित जलापूर्ति की कमी और खराब चापाकल के कारण लोगों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई मोहल्ले 'ड्राई जोन' बन गए हैं, जिससे स्थिति और विकट हो गई है।

देवघर। गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा है और इसके साथ ही एक बार फिर शहरवासियों के मन में पानी की किल्लत को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हर साल की तरह इस वर्ष भी तापमान में बढ़ोतरी के शुरुआती संकेत मिलते ही लोगों के बीच जल संकट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शहर के अधिकांश हिस्से लंबे समय से जल संकट से जूझ रहे हैं। वर्ष भर पानी के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक विकट होने की आशंका सताने लगती है। शहर के अधिकांश जगहों पर सप्लाई वाटर की आपूर्ति नहीं होती है।
जहां सप्लाई वाटर की आपूर्ति भी की जाती है। वहां नियमित रुप से पानी नहीं पहुंचता है। अधिकांश चापाकल जर्जर और खराब हो गए हैं। नियमित सफाई के अभाव में जगह-जगह कचरे का ढेर लगा हुआ है। नालियां कचरे और गंदगी से भरी पड़ी है। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर हिन्दुस्तान से संवाद के दौरान लोगों ने अपनी अपेक्षाओं को लेकर अपनी-अपनी बात रखी। शहर के कई मोहल्ले ऐसे हैं जो तथाकथित ‘ड्राई जोन’ के रूप में पहचाने जाते हैं। यहां नियमित जलापूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। कुछ क्षेत्रों में पाइपलाइन के माध्यम से जलापूर्ति की व्यवस्था तो है, लेकिन वह भी बेहद अनियमित है। अधिकांश जगहों पर दो से तीन दिन के अंतराल पर महज एक घंटे के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है। इस सीमित समय में लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी का संग्रह करना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ यह अंतराल और भी लंबा हो जाता है। कई इलाकों में पांच से छह दिन के बाद ही नलों में पानी आता है। ऐसे में लोगों को एक-एक बूंद पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। जिन परिवारों के पास पानी संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, उन्हें अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। सुबह-शाम पानी भरने को लेकर घरों में तनाव की स्थिति बनी रहती है।
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