विभिन्न क्षेत्रों में चलाया गया विमुक्ति अभियान
देवघर जिला में बाल श्रमिक विमुक्ति के लिए अभियान चलाया गया। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश पर धावा दल ने विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण किया, लेकिन कोई बाल श्रमिक नहीं मिला। प्राप्त शिकायत के परिवार से पूछताछ की गई। इस अभियान में कई संगठनों के सदस्य शामिल थे।

देवघर। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को प्राप्त शिकायत एवं उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देशानुसार देवघर जिला अंतर्गत बाल श्रमिक विमुक्ति के लिए देवघर जिला में गठित धावा दल के सदस्यों द्वारा शनिवार को देवघर जिला के विभिन्न क्षेत्रों में विमुक्ति अभियान चलाया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देशानुसार पटेल चौक स्थित श्यामगंज रोड में सघन अभियान चलाया गया। जिसमें किसी बाल श्रमिक का पता नही चल पाया। प्राप्त शिकायत के परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ किया गया। जिस क्रम में उनके द्वारा किसी भी बाल श्रमिक से कभी भी काम कराने से इनकार किया गया।
साथ ही देवघर जिला के अन्य कई प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिक विमुक्ति अभियान चलाया गया। जिसमें कोई भी प्रतिष्ठान में बाल श्रमिक नहीं पाया गया। धावा-दल में श्रम अधीक्षक देवघर के अतिरिक्त जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी मीरा कुमारी, जिला बाल कल्याण समिति के चेयरमेन कौशल कुमार, देवघर जिला के सभी प्रखंड के श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी, एनजीओ आश्रय से नीता पाठक, एनजीओ प्रेरणा भारती से शंकर दास, चाइल्ड हेल्पलाइन कॉर्डिनेटर अनिल पासवान, सुबोध मंडल एवं सुजित कुमार वर्णवाल शामिल थे। किसी भी प्रतिष्ठान में बाल श्रमिकों से कार्य कराना संज्ञेय अपराध है। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं उन्मुलन) अधिनियम 1986 एवं संशोधित अधिनियम 2016 की धारा-3 या धारा-3 ए के उल्लघंन पर धारा-14 के अनुसार नियोक्ता पर 20 हजार से 50 हजार रुपए तक जुर्माना अथवा 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास या दोनों हो सकता है।

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