दु:खहरण महादेव मंदिर प्रखंड की ऐतिहासिक धरोहर
सारठ के अजय नदी तट पर स्थित दु:खहरण महादेव मंदिर ऐतिहासिक धरोहर है। यह मंदिर पांडवों द्वारा पूजा किए जाने के साथ-साथ लोक कथाओं से भरा हुआ है। 1955 में इसका निर्माण हुआ था और हर सोमवार, पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। यहाँ सती घाट का भी महत्व है, जहाँ एक महिला अपने पति के लिए सती हुई थी।

सारठ। सारठ के अजय नदी तट स्थित अति प्राचीन दु:खहरण महादेव मंदिर प्रखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहर में से एक है। दुखिया बाबा के नाम से विख्यात इस मंदिर व बाभनगामा अजय नदी पुल के पास सती घाट के संदर्भ में अनेक लोक कथाएं प्रचलित है। कहा जाता है कि जिस प्रकार वैद्यनाथ महादेव की पूजा-प्रतिष्ठा लंकेश रावण ने की थी, उसी प्रकार द्वापर युग में इस दुखिया बाबा की पूजा पांडवों ने की थी। इसके प्रमाण के तौर पर इस क्षेत्र के बूढ़े-पुराने लोगों द्वारा बताया जाता है कि यहां से 6 मिल दूर स्थित पथरड्डा पहाड़ पर चट्टानों में भीम के पांव, धनुर्धर अर्जून के रथ के पहियों का निशान आदि इस ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि अपने वनवास के समय पांडव इसी रास्ते से होकर गुजरे थे।
उसी क्रम में अपने पूर्वजों से मुलाकत कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके कहने पर पवित्र अजय नदी के जल से दुखिया बाबा का अभिषेक किया था। अपने कुशलक्षेम व राज वापसी का वरदान लिया था। दुखिया बाबा पहले एक पीपल के पेड़ के नीचे चबूतरे पर विराजमान थे। सन 1955 में स्व.रामगुलाम साह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। वहीं सारठ के स्व.मुक्तिनाथ झा ने यहां एक कुआं का निर्माण करवाया था, जिसे लोग मुक्ति कुआं के नाम से पुकारते हैं। सारठ के एक श्रद्धालु हरि साह ने माता पार्वती मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर परिसर में भगवान कुबेर,बजरंगबली आदि देवी देवताओं का मंदिर विराजमान है। प्रत्येक सोमवार, पूर्णिमा व खास तिथियों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। शिवरात्रि के अवसर पर यहां का माहौल शिवमय हो जाता है। दुखिया बाबा मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय में श्रंगार पूजा का प्रचलन है। बाबा वैद्यनाथ मंदिर की तरह यहां भी इस क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के लोगों द्वारा अपनी कन्याओं का विवाह कराते है। मंदिर की व्यवस्था के लिए शिव भक्तों की ओर से शिव-शक्ति समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा वर्तमान समय में शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कर भव्य निर्माण किया गया है। वहीं शिव -शक्ति समिति द्वारा अपने फंड से गरीब लड़कियों की शादी भी कराते है। इस मंदिर से कुछ ही दूरी पर अजय नदी स्थित सती घाट का भी विशेष महत्व है। बताया जाता है कि पति के वियोग में एक स्त्री अपने पति के चिता में जिंदा सती हो गई थी। इसलिए इसका नाम सती घाट पड़ा है। इस तरह की किंवदन्ती है।

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