साधना ही है जीवन का सार और साधना ही है मनुष्य का धर्म
Newswrap हिन्दुस्तान, देवघर
देवघर में भुक्ति कमेटी द्वारा 18-19 अप्रैल को 24 घंटे का अक्षष्टाक्षरी महामंत्र बाबा नाम केवलम कीर्तन का आयोजन किया गया। आचार्य प्रभद्रानंद ने साधना के महत्व पर चर्चा की। आचार्य अमितबोधानंद ने कीर्तन की महिमा का वर्णन किया। इस कार्यक्रम में आनंदमार्ग के कई अनुयायी शामिल हुए।
देवघर, प्रतिनिधि। भुक्ति कमेटी देवघर द्वारा आनंदमार्ग जागृति राजाबगीचा देवघर में 18 अप्रैल अपराह्न 12 बजे से 19 अप्रैल अपराह्न 12 बजे तक 24 घंटे का अक्षष्टाक्षरी महामंत्र बाबा नाम केवलम कीर्तन का आयोजन सत्यनारायण दादा के सौजन्य से किया गया। कार्यक्रम के अंत में आनंदमार्ग प्रचारक संघ के क्षेत्रीय सचिव आचार्य प्रभद्रानंद अवधूत ने जीवन में साधना के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि साधना ही जीवन का सार है औऱ यह जीवन हमें साधना के लिए मिला है, इसे व्यर्थ मत जाने दीजिए, साधना ही मनुष्य का धर्म है। इसके बाद आचार्य अमितबोधानंद अवधूत ने कीर्तन की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि ज़ब हम साधना करते हैं तो भक्त भगवान की ओर बढ़ते हैं। लेकिन हम जब कीर्तन करते हैं तो भगवान भक्त की ओर बढ़ते हैं। कहा कि मानव शरीर एक जैविक मशीन है और प्रवृत्तियों द्वारा संचालित साधना का विज्ञान है। नाहं वसामि बैकुंठे, योगनां ह्रदय न च। मदभक्ता यत्र गायन्ति, तत्र तिष्ठामी नारद।। इस दौरान भुक्ति प्रधान सुनील ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया एवं गिरीश दादा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर आचार्य भावानंद अवधूत, आचार्य मधुमयानन्द अवधूत, आचार्य अमितबोधानंद अवधूत, अवधूतिका आनंद केतकी, आचार्या एवं गोड्डा, दुमका एवं देवघर के बहुत सारे आनंदमार्ग के अनुयायियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस बात की जानकारी आनंद मार्ग प्रचारक संघ देवघर के जनसंपर्क सचिव विकाश कुमार ने दी।
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