CID की जांच में बड़ा खुलासा! अभय ने पेपरलीक से वसूली तक के लिए बनाया ‘कॉरपोरेट सिंडिकेट’

लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितता के मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने कॉरपोरेट स्टाइल में पेपरलीक से लेकर वसूली व ब्लैकमेलिंग तक का अलग-अलग सिंडिकेट तैयार किया था। सीआईडी की अलग-अलग एसआईटी जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में अनियमितता की जांच कर रही हैं।

झारखंड सीआईडी
जेपीएससी पेपर लीक मामले में सीआईडी का बड़ा खुलासा

झारखंड जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितता के मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने कॉरपोरेट स्टाइल में पेपरलीक से लेकर वसूली व ब्लैकमेलिंग तक का अलग-अलग सिंडिकेट तैयार किया था। सीआईडी की अलग-अलग एसआईटी जेपीएससी व जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में अनियमितता की जांच कर रही हैं।

जांच में यह बात सामने आई है कि 14वीं जेपीएसससी समेत अन्य परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों ने सेटिंग करायी थी, उन सभी के पैसे नहीं मिलने पर ब्लैकमेल करने तैयारी भी अभय ने की थी। इसके लिए अभय के द्वारा 24 सफल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, ए4 साइज के ब्लैंक पेपर पर हस्ताक्षर व चेकबुक उसके द्वारा रख लिए गए थे। अगर किसी परीक्षार्थी के द्वारा चयन के बाद भी पैसे नहीं दिए जाते तो वह परीक्षार्थियों को अलग-अलग तरीके से ब्लैकमेल करता। सीआईडी की जांच में यह बात सामने आयी है कि अभय तिवारी ने गिरोह के पास दस्तावेज जुलाई माह तक थे। इस दौरान जब जेपीएससी परीक्षाओं में अनियमितता की चर्चा होनी लगी, तब तब सारे अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट उमेश कुमार ने अपने पास रखे थे।

भाई के जरिए साले तक पहुंचाता था पैसा

अभय तिवारी ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में यह बताया गया है कि उसने 11 अभ्यर्थियों से उगाही का पैसा भाई अक्षय के जरिए उसके साले सौरभ पांडेय तक पहुंचाए थे। वहीं अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को उपलब्ध करायी गई थी। वहीं, उमेश ने बताया है कि जेपीएससी परीक्षा में अनियमितता में जब सारे खुलासे होने लगे, तब वह बनारस चला गया था। बनारस से लौटने के बाद उसने रांची के बाहर अभ्यर्थियों को दस्तावेज सौंप दिए थे। जांच में यह बात भी सामने आयी है कि अभय तिवारी के साथ मिलकर उमेश कुमार ने कई अन्य परीक्षाओं में भी वसूली की थी।

जानिए कैसे कॉरपोरेट स्टाइल में करता था काम

अभय तिवारी ने टीडीपीएल की इंट्री झारखंड में करायी थी। इसके लिए साले सौरभ पांडेय के नाम पर ही लालपुर स्थित फ्लैट का लीज एग्रीमेंट कराया गया। परीक्षा में ओएमआर समेत अन्य छेड़छाड़ की जा सके, इसके लिए उसने टीडीपीएल व लखनऊ की कंपनी पिकर टेक्नोलॉजी के बीच एग्रीमेट भी कराया था। केस में गिरफ्तार हो चुके मो उस्मान व मो एबाद पिकर के लिए ही काम करते थे। कंपनी के निदेशक हेमंत शर्मा को कंपनी का खर्च उठाने के अलावे 20 प्रतिशत कमीशन का झांसा भी दिया गया था।

Mohammad Azam

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संक्षिप्त विवरण

मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।


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परिचय और अनुभव: मोहम्मद आजम पिछले तीन सालों से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। कम समय में आजम ने पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया की बारीकियां सीखी हैं और अब भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट न्यूज टीम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।


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आजम की देश की राजनीति में काफी रुचि है। आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद की राजनीतिक घटनाओं की कई किताबों का अध्ययन होने के चलते अच्छी समझ है। यही कारण रहा कि आजम ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीतिक बीट से की। राजनीति के साथ आजम क्राइम और सोशल मीडिया पर वायरल चल रही खबरों में भी अच्छी महारत हासिल है।


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आजम का मानना है कि पत्रकारिता जनपक्षीय होनी चाहिए। पत्रकारिता के दौरान अपनी भावनाओं को काबू में रखकर तथ्य आधारित पत्रकारिता आजम को जिम्मेदार बनाती है। पत्रकारिता में आजम तथ्य आधारित सूचनाएं पहुंचाने के साथ ही, साहित्यिक लेखन में भी महारत हासिल है।


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