68% काम पूरा होने के बाद भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहा टंडवा : विधायक
टंडवा में लोग शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं, जबकि सरकार ने 68 प्रतिशत योजना पूर्ण होने का दावा किया है। विधायक कुमार उज्ज्वल ने कहा कि वास्तविकता कुछ और है और सरकार को ठोस परिणाम दिखाने की जरूरत है। चापाकल खराब हैं और औद्योगिक योजनाएं ठप पड़ी हैं। जल संकट विकराल हो रहा है।

टंडवा, निज प्रतिनिधि। टंडवा में जहां एनटीपीसी, सीसीएल और सरकार की 225 करोड़ रुपये की योजनाएं चल रही हैं, वहां के लोग आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। यह स्थिति तब है जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग इस योजना के 68 प्रतिशत पूर्ण होने का दावा कर रहा है। सिमरिया विधायक कुमार उज्ज्वल ने सदन में सरकार को घेरते हुए कहा कि क्षेत्र की जनता को अब आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक उठाएंगे। विधायक द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु विधायक ने कहा कि तारांकित प्रश्न संख्या-12 के उत्तर में सरकार ने जो आंकड़े दिए हैं, वे जमीनी हकीकत से दूर हैं।
संपूर्ण टंडवा प्रखंड ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना को कागजों पर 68% पूरी बताया जा रहा है, लेकिन जनता प्यासी है। चापाकलों की खराब स्थिति सरकार प्रखंड में 1966 चालू चापानलों का दावा कर रही है, जबकि वास्तविकता में अधिकांश चापाकल या तो खराब हैं या उनसे पानी नहीं निकल रहा है। औद्योगिक घरानों की विफलता एनटीपीसी और सीसीएल द्वारा संचालित पेयजल योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। सरकार की निगरानी और जवाबदेही की कमी के कारण ये योजनाएं बेअसर साबित हो रही हैं। वित्त आयोग का निष्प्रभावी होना 14वें और 15वें वित्त आयोग की योजनाओं का भी धरातल पर कोई खास प्रभाव नहीं दिख रहा है। निष्कर्ष और मांग गर्मी की शुरुआत के साथ ही जल संकट विकराल रूप ले रहा है। विधायक ने मांग की है कि केवल कागजी प्रगति दिखाने के बदले सरकार अधूरे कार्यों को तत्काल पूरा करे, खराब योजनाओं की मरम्मत कराए और पारदर्शी तरीके से इसकी समीक्षा कर जनता को राहत प्रदान करे।
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