सिमरिया अनुमंडल में सामाजिक कुरीति निवारण एवं बाल विवाह उन्मूलन को लेकर कार्यशाला संपन्न
सिमरिया में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य बाल विवाह और डायन प्रथा जैसे सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन करना है। जिला परिषद अध्यक्ष ममता कुमारी ने कहा कि समाज अब जागरूक हो रहा है और बाल विवाह मुक्त चतरा की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सिमरिया निज प्रतिनिधि । अनुमंडल में सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन एवं बाल विवाह मुक्त झारखण्ड के लक्ष्य को साकार करने हेतु अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का सफल आयोजन रविवार को किया गया। यह कार्यशाला सिमरिया डाइट परिसर में आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष ममता कुमारी, विशिष्ट अतिथि जिला परिषद उपाध्यक्ष बृजकिशोर तिवारी, सिमरिया प्रभारी एसडीओ महेश्वरी प्रसाद यादव, चतरा एसडीपीओ, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी एवं सिमरिया प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर महिला पर्यवेक्षिकाओं द्वारा अतिथियों का पौधा भेंटकर स्वागत किया गया, वहीं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी द्वारा प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए जिला समाज कल्याण पदाधिकारी रेणु रवि ने बताया कि बाल विवाह के उन्मूलन हेतु केंद्र सरकार द्वारा 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाह हेतु बालिकाओं की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा बालकों की 21 वर्ष निर्धारित है, इससे कम आयु में विवाह कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जन- जागरूकता बढ़ाना इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष ममता कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय कम उम्र में विवाह को सामाजिक परंपरा माना जाता था, किंतु आज समाज तेजी से जागरूक हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में समाज इन रूढ़िवादी परंपराओं का पूर्णत: बहिष्कार करेगा और चतरा जिला बाल विवाह मुक्त जिला के रूप में स्थापित होगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद उपाध्यक्ष बृजकिशोर तिवारी ने प्रभावशाली शब्दों में कहा कि "बाल विवाह और डायन प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों का अंत अब केवल संकल्प नहीं, बल्कि निश्चित परिणाम है। आज हमारी बेटियाँ शिक्षा, खेल, प्रशासन और हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि बेटियाँ किसी से कम नहीं हैं। कार्यक्रम में उपस्थित सेविका बहनें स्वयं इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं, जिन्होंने संघर्षों के बावजूद समाज में अपनी पहचान बनाई है। अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इन कुप्रथाओं को जड़ से समाप्त करें। अनुमंडल पदाधिकारी महेश्वरी प्रसाद यादव ने कहा कि समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयास से ही चतरा जिला बाल विवाह मुक्त बन सकता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एवं डायन प्रथा केवल सामाजिक कुरीतियाँ नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध हैं। हमारा उद्देश्य कानून के भय से नहीं, बल्कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। कार्यशाला में राज्य से प्रतिनियुक्त रिसोर्स पर्सन प्रियंका रानी द्वारा बाल विवाह एवं डायन प्रथा से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी पीपीटी एवं वीडियो क्लिप के माध्यम से दी गई। इस अवसर पर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, मुखियागण, जिला परियोजना सहयोगी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, शिक्षकगण, स्वयं सहायता समूह की सदस्य, सहिया दीदी एवं जिला समाज कल्याण विभाग के कर्मी उपस्थित थे।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।



