
शिक्षा के क्षेत्र मे अलख जगाने के लिए 1990 के दशक से लेकर आज तक किया संघर्ष
शिक्षा के क्षेत्र मे अलख जगाने के लिए 1990 के दशक से लेकर आज तक किया संघर्षशिक्षा के क्षेत्र मे अलख जगाने के लिए 1990 के दशक से लेकर आज तक किया संघर्ष
कुंदा, प्रतिनिधि । कुंदा की धरती पर जन्मे समाजसेवी विनोद सिंह की कहानी प्रेरणादायक है। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कुंदा जैसे सुदरवर्ती क्षेत्र से प्रारंभ की और 1983 में मैट्रिक पास किया। इसके बाद इन्होंने औरंगाबाद जाकर 1989 में अर्थशास्त्र से ऑनर्स कर स्नातक परीक्षा पास की। 1990 में इन्होंने कुंदा वापस लौटकर अपने सहपाठियों के साथ मिलकर समाज सेवा करने की ठान ली। इन्होंने कुंदा में एक स्कूल खोलने का निर्णय लिया ताकि कुंदा जैसे पिछड़े क्षेत्र में लोग अपने बच्चों को शिक्षा दे सकें। इसी उद्देश्य से इन्होंने प्रस्तावित जनता उच्च विद्यालय की स्थापना की और लगभग 14 वर्षों तक नि:शुल्क शिक्षा देने का कार्य किया।जिसका
परिणाम हुआ की 1990 के दशक में भी कई होनहार युवाओं ने शिक्षा ग्रहण कर खुद शिक्षक बने जिसमे वर्तमान मुखिया मनोज साहू का भी नाम शामिल है। इसके बाद इन्होंने 2004 में एनजीओ बनाकर लोगों को शिक्षा के साथ स्वच्छता को लेकर जागरूकता करने के कार्य किया। वे आज भी शिक्षा के साथ कई जनकल्याणकारी कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं।वही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन्होंने अपनी दिलचस्पी दिखाई व चुनाव लड़ने का निर्णय लिया लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था,उसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि गुरु जी के नाम से विख्यात विनोद सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ पदाधिकारी को सुधारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते थे। उनकी कमी अब कुंदा के ग्रामीणों को खलने लगी है। भले ही वे पूर्व में चुनाव हार चुके हैं लेकिन उनकी कार्यशैली व समर्पण जनता को एक बार पुन: प्रोत्साहित कर रही है।

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