Chatra News: पार्थेनियम से फसल, पशु और स्वास्थ्य बचाने की मुहिम
Chatra News: चतरा जिला में 16 से 22 अगस्त तक गाजर घास यानी कांग्रेस घास का जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को नुकसान और नियंत्रण के तरीकों के बारे में बताया। पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस फसलों और पर्यावरण के लिए हानिकारक है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे इसे उखाड़कर नष्ट करें।

Chatra News: चतरा, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। चतरा जिला में गाजर घास यानी कांग्रेस घास के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 16 से 22 अगस्त तक गाजर घास जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र, चतरा और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, झारखंड की ओर से किसानों और आम लोगों को इस खतरनाक खरपतवार से होने वाले नुकसान और इसके नियंत्रण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस तेजी से फैलने वाला खरपतवार है, जो खेतों, सड़क किनारे, खाली जमीन, चरागाह और घरों के आसपास आसानी से उग जाता है। यह फसलों के साथ पानी, पोषक तत्व और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करता है।
इसके कारण फसलों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होने के साथ मिट्टी तथा स्थानीय जैव विविधता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। खेतों की मेड़ों और खाली जमीन से यह तेजी से कृषि योग्य भूमि में फैल सकता है।विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि पार्थेनियम को फूल और बीज बनने से पहले जड़ सहित उखाड़कर नष्ट करें। पौधे हटाते समय दस्ताने, जूते और पूरे कपड़े पहनना जरूरी है, क्योंकि इसके संपर्क में आने से त्वचा में खुजली, लाल चकत्ते और श्वसन संबंधी एलर्जी हो सकती है।अधिक प्रकोप वाले क्षेत्रों में कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उचित खरपतवारनाशी का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं, पार्थेनियम बीटल के माध्यम से जैविक नियंत्रण भी संभव है। विशेषज्ञों ने गांवों में सामूहिक अभियान चलाकर सड़क किनारे, खेत की मेड़, चरागाह और खाली जमीन से गाजर घास हटाने की अपील की है।किसानों का संदेश है-फूल और बीज बनने से पहले पार्थेनियम हटाएं, स्वस्थ खेत, स्वस्थ पशु और स्वस्थ परिवार बनाएं।


