सारंडा जंगल के बालिबा में दो आईईडी विस्फोट में कोबरा के दो जवान घायल

सारंडा जंगल के बालिबा में दो आईईडी विस्फोट में कोबरा के दो जवान घायल

संक्षेप:

प. सिंहभूम के सारंडा जंगल में सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के दो आईईडी विस्फोट में दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गये। कोबरा 209 बटालियन के दोनों जवानों को प्राथमिक उपचार के बाद रांची एयरलिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।

Dec 15, 2025 02:23 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, चक्रधरपुर
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चक्रधरपुर/मनोहरपुर, संवाददाता प. सिंहभूम के सारंडा जंगल में सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के दो आईईडी विस्फोट में दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गये। दोनों कोबरा 209 बटालियन के हैं। रविवार दोपहर छोटानागरा थाना क्षेत्र के बालिबा इलाके में विस्फोट के बाद सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। सारंडा जंगल के बालिबा इलाके में नक्सली गतिविधि के बाद चाईबासा पुलिस और कोबरा 209 बटालियन द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। तभी दोपहर करीब 1.45 बजे हेड कांस्टेबल अलख दास आईईडी की चपेट में आ गये और गंभीर रूप से घायल हो गये। उन्हें निकालने के लिए जवान लगभग 3.15 बजे घटनास्थल पहुंचे, तभी दूसरा आईईडी विस्फोट हो गया।

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इसकी जद में आकर कोबरा 209 बटालियन का एक और कांस्टेबल घायल हो गया। इसका नाम नारायण दास बताया जा रहा है। हालांकि, इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसपी अमित रेणु ने कहा कि विस्फोट के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। बम निरोधक दस्ता ने चलाया सर्च ऑपरेशन : घटना के बाद कोबरा बटालियन के बम निरोधक दस्ता द्वारा आसपास के इलाकों में सर्च ऑ़परेशन चलाया गया। इस दौरान कई आईईडी भी मिलने की सूचना है। वहीं, दोनों घायल जवानों को सुरक्षित बालिबा स्थित सीआरपीएफ कैंप लाकर प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। वहीं, बेहतर इलाज के लिए रांची एयरलिफ्ट करने की तैयारी का जा रही है। मनोहरपुर से एम्बुलेंस भी मौके पर भेजी गयी है, जिससे कि जल्द से जल्द घायल जवानों को बेहतर इलाज मिल सके। नक्सलियों ने जंगल में जगह-जगह लगा रखे हैं आईईडी बम : सूत्रों के अनुसार नक्सलियों ने सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए जगह-जगह आईईडी बम प्लांट कर रखे हैं। इस कारण सर्च ऑपरेशन के दौरान विस्फोट में सुरक्षाबलों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर ग्रामीणों को भी नुकसान पहुंच रहा है। जीविकोपार्जन के लिए जंगल पर निर्भर रहने वाले ग्रामीण पत्ता तोड़ने, दातून तोड़ने या फिर जंगली पदार्थ लाने के लिए जंगल जाते हैं, तो आईईडी की चपेट में आकर घायल होने के साथ बेमौत मारे जा रहे हैं।