
घेराबंदी के बाद भी चकमा दे मयूरभंज के रोरुवां जंगल भागा दंतैल हाथी
चाईबासा वन प्रमंडल के तिलोकुटी गांव में दंतैल हाथी के हमले में दो लोगों की मौत हो गई। ग्रामीणों ने हाथी को गांव की झाड़ियों में रोक रखा और वन विभाग को सूचना दी। कई टीमें हाथी को काबू में करने में जुटी रहीं, लेकिन हाथी जंगल की ओर भागने में सफल रहा। ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गुस्सा देखने को मिला।
मझगांव, संवाददाता चाईबासा वन प्रमंडल के तिलोकुटी गांव में सुबह दंतैल हाथी के हमले में दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों ने गांव की झाड़ियों में ही उसे खदेड़कर रखा और वन विभाग को सूचना दी। मझगांव पुलिस और वन विभाग की टीम ने पहुंचते ही घेराबंदी शुरू कर दी। सुबह से ही ड्रोन कैमरे से हाथी पर नजर रखते हुए ट्रैंकुलाइज करने के लिए प्रयास करती रही। हाथी गांव से बाहर नहीं भागे इसके लिए गांव के चारों और पूरे दिन ट्रैक्टर चला आवाज करती रही। पटाखे भी जलाये। आखिरकार टीम ने शाम को ट्रैंकुलाइज करने की योजना बनायी, पर यमराज बना दंतैल हाथी वन विभाग को चकमा देकर सीमावर्ती ओडिशा के जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ।
वह ओडिशा के मयूरभंज जिले के रोरुवां इलाके के जंगल में प्रवेश कर गया। हाथी को काबू करने में पूरे दिन कसरत करते रहे अधिकारी : हाथी को काबू में करने के लिए बहु-राज्यीय रेस्क्यू ऑपरेशन, वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। घटनास्थल पर हाथी को पकड़ने, गन-शॉट इंजेक्शन देने तथा उसे सुरक्षित रूप से जंगल की ओर खदेड़ने को लेकर वन विभाग एवं रेस्क्यू की कई टीमें पहुंची हुई थीं। विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से विशेषज्ञों के साथ बंगाल से 20 सदस्यीय टीम, चांडिल-दलमा से 10-10 सदस्यीय दो टीमें, ओडिशा से 12 से 15 सदस्यीय टीम, जबकि नोवामुंडी और हटगम्हरिया वन विभाग की 15 से 20 सदस्यीय टीमें मौके पर तैनात रहीं। ट्रैंकुलाइज करने के लिए मेडिकल टीम भी अभियान में शामिल रही। रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही थी। मौके पर सारंडा के अनुरूप सिंह, चाईबासा के डीएफओ आदिनारायण समेत दो अन्य डीएफओ भी उपस्थित रहे। बावजूद इसके दंतैल हाथी वन विभाग की टीम को चकमा देने में कामयाव रहा। वन विभाग के प्रति ग्रामीणों में दिखा गुस्सा : हाथी के उत्पात को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष दिखा। ग्रामीणों का कहना था कि दो लोगों की जान चली गयी है, फिर भी प्रशासन और वन विभाग ने पकड़ने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते यदि हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया जाता तो घटना नहीं घटती। ग्रामीणों का कहना था कि जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ेगा, हाथी की सक्रियता और अधिक बढ़ जाएगी, जिससे उसे काबू में करना और भी मुश्किल हो जाएगा। यमराज बने हाथी को देखने पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी पहुंचे थे लोग : पिछले नौ दिनों में 19 लोगों की जान लेने वाले दंतैल हाथी के तिलोकुटा गांव में घेरे जाने के सूचना मिलते ही झारखंड के बेनीसागर और आसपास के गांवों के अलावा बड़ी तदाद में पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी ग्रामीण पहुंच गये। करीब दस किलो मीटर लंबा लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रसासन द्वारा लोगों को झाड़ियों में छिपे हाथी के पास जाने के रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा बार-बार लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और इलाके से हटने की अपील की जाती रही। बावजूद इसके ग्रामीण भीड़ में शामिल रहे, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रही। झाड़ियों से भागने के लिए बार-बार निकल रहा था हाथी : दंतैल हाथी को देखने के लिए एक ओर जहां लोगों का हुजूम जमा हो गया था, वहीं तिलोकुटी गांव की झाड़ियों से बाहर निकलने का हाथी प्रयास कर रहा था। जिससे कि वह ठिकाना बदल सके। इसी बीच कई बार वह लोगों को दौड़ाते भी नजर आया। लोग भी हाथी को देखकर इधर-उधर भागते नजर आये और पूरे दिन भीड़ जुटी रही।

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