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दस मरीजों में डायरिया व छह में मिली मलेरिया की शिकायत

सोनुवा प्रखंड लोंजो पंचायत के सुदूरवर्ती दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित माईलपीड़ गांव के लोगों में नदी व चुआं का गंदा पानी पीने से डायरिया फैली है। अब भी गांव के करीब एक दर्जन से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित हैं। दूसरे दिन गुरुवार को माईलपीड़ गांव पहुंच कर मेडिकल टीम ने कैम्प कर मरीजों की जांच की। इसमें दस मरीजों में डायरिया व छह मरीजों में मलेरिया की शिकायत पायी गई।

इनमें तीन मरीज 60 वर्षीय झिंगी सोय, एक वर्षीय दासो बोदरा व एक वर्षीय डांगो बोदरा की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। झिंगी व दासो बोदरा डायरिया से पीड़ित है, वहीं डांगो बोदरा मलेरिया से पीड़ित है।चिकित्सा प्रभारी के नेतृत्व में गांव पहुंचा मेडिकल टीम : गुरुवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. नरेश बास्के के नेतृत्व में मेडिकल टीम गांव पहुंच इलाज किया। टीम में सदर अस्पताल चाईबासा के डॉ. दिलीप कुमार सिन्हा, सदर अस्पताल के आईडीएसपी अजमद अजीम मुख्य रूप में शामिल थे। मेडिकल टीम द्वारा करीब 60 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की। इनमें चारिवा बोदरा (4), दासो बोदरा (1), कुंवर बोदरा (1), भादो सोय (2), सुनिया सोय (2), झिंगी सोय (60), बेराग सोय (28), बागुन बोदरा (25), सुनिया सोय (42), जुगा बोदरा (20) में उल्टी-दस्त की शिकायत पायी गई, जिनको दवा दी गई।

स्कूल बना अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र : गांव में स्थित उत्क्रमिक प्राथमिक विद्यालय माईलपीड़ में मेडिकल कैम्प लगाया गया। जहां पर मरीजों का इलाज किय गया। वहीं, गांव में डायरिया से चार मौत होने के बाद ग्रामीण काफी डरे-सहमें हुए हैं। इससे बच्चे भी स्कूल नहीं आये। गांव में नहीं है एक भी चापाकल : माईलपीड़ गांव में एक भी चापाकल नहीं है। ग्रामीण गांव के पास स्थित नदी व चुआं का गंदा पानी पीते हैं। इससे ग्रामीणों को डायरिया, मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी हुई। गांव के मुंडा डांगो डांगिल व ग्रामीणों ने बताया कि गांव में चापाकल के लिए उन्होंने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई। लेकिन, अभी तक गांव में एक भी चापाकल नहीं बन पाया है।

ग्रामीण करते रहे पूजापाठ : माईलपीड़ गांव में अंध-विश्वास इतना है कि ग्रामीण बीमारी को ठीक करने के लिए अस्पताल नहीं जाकर पूजापाठ करते हैं। एक सप्ताह पहले कई लोग बीमार हो गये। बीमारी ठीक करने के लिए ग्रामीणों ने ओझा-गुणी के ऊपर भरोसा कर पूजापाठ आरम्भ किया। लेकिन विगत गुरुवार को सिंगराय सोय की की मौत हो गई। इसके बाद लगातार तीन की मौत हो जाने से वह अस्पताल पहुंचे।

बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें : क्षेत्र में कुछ दिनों से जारी बारिश के कारण मेडिकल टीम को माईलपीड़ गांव पहुंचने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गांव के लोगों में अंध-विश्वास का पांव पसरा हुआ है। वहां की स्थिति इतनी खराब है कि गांव के लोग इलाज से कतरा रहे हैं। मरीजों को घर से निकल कर मेडिकल कैम्प पहुंचाया गया। जहां काफी समझाने के बाद बड़ी मुश्किल से मरीज इलाज के लिए तैयार हुए। गांव की सहिया ने बताया कि गांव के लोग दवा नहीं लेते हैं। यदि कोई मरीज को जबरदस्ती दवा दे भी दे दी जाती है तो वह दवा नहीं खाकर उसे फेंक देता है।

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  • Web Title:Ten patients have diarrhea and six malaria complaints