प्रलोभन देकर होने वाले धर्मांतरण को रोके सरकार : शंकराचार्य
द्वारिकापीठाधीश्वर स्वामी श्री सदानंद सरस्वती ने धर्मांतरण के मुद्दे पर सरकार से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रलोभन और सुविधाओं के माध्यम से धर्मांतरण बढ़ रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि धर्म को नहीं बदला जा सकता और न्याय की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।

मनोहरपुर/आनंदपुर,संवाददाता। द्वारिकापीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रलोभन व सुविधा देकर धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे रोकने की दिशा में सरकार हर हाल में कार्रवाई करे। वे शनिवार को पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर स्थित पारलीपोस स्थित विश्व कल्याण आश्रम में शनिवार को मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ज्योतिषपीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे आरोप को गलत बताया। माता-पिता की तरह धर्म भी नहीं बदला जा सकता है : शंकराचार्य ने कहा कि मूलभुत सुविधा की कमी, अज्ञानता व अपने धर्म व परंपरा का ज्ञान नहीं होने के कारण ही धर्मांतरण होता है।
धर्म बदलने पर अपने पिता व पूर्वजों की परंपरा से प्राप्त धर्म और त्याग को कैसे किया जा सकता है। जैसे कोई अपने माता-पिता को नहीं त्याग सकता है, उसी प्रकार अपने धर्म को भी त्यागा नहीं जा सकता है। हिन्दू व सनातन समाप्त नहीं हो सकता : सदानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदू व सनातन धर्म को कोई समाप्त नहीं कर सकता है। धर्म परिवर्तन करने वाले का नाम आधार कार्ड से काटना चाहिए। ऐसे लोगों का नाम भी हिन्दू बना हुआ, और वे लोग धर्म परिवर्तन कर मिशनरी सुविधा ले रहे हैं, इसकी जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचता है और इसी का फायदा उठाकर प्रलोभन देकर मिशनरी लोग धर्मांतरण कराते हैं। न्याय जल्द मिले इसके लिए बदलें संविधान : शंकराचार्य ने कहा कि हमारे देश में न्याय काफी देर में मिलता है और न्याय का विलम्ब से मिलना भी अन्याय है। न्याय प्रक्रिया बदलनी चाहिए। इसके लिए जरूरत हो तो संविधान भी बदलना चाहिए। सौ से ज्यादा बार संविधान बदला जा चुका है, तो जरूरत के हिसाब से संविधान भी बदलना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद को फंसाया जा रहा : सदानंद सरस्वती ने कहा कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे सभी आरोप झूठे व बेबुनियाद हैं। उन्हें राजनीतिक षड़यंत्र के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है। हिन्दू सनातन धर्म के आचार्य पर आक्षेप करना एक सोची समझी साजिश है। आखिर में शंकराचार्य की ही जीत होगी। वे धर्म, सिद्धांत और सनातन की बात करते हैं और राजनीतिक पार्टी उन्हें अपने ऊपर ले लेती है। वह अंग्रेजों की तरह सनातन धर्म को बदमान करने व तोड़ने में लगी है। इसके लिए सभी जिम्मेदार है। शंकराचार्य गौ हत्या वाले मुद्दे पर बात कर रहे हैं तो उसे भटकाया जा रहा है। अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति भी वैधानिक तरीके से हुई है। उस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है।
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