Success Story: Work From Harmless to Life - सक्सेस स्टोरी : मजदूर से हस्तशिल्पी बन जीवन को संवारा DA Image
11 दिसंबर, 2019|3:33|IST

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सक्सेस स्टोरी : मजदूर से हस्तशिल्पी बन जीवन को संवारा

मजदूर से हस्तशिल्पी बन महिलाएं अपनी जिंदगी संवार रही हैं। एक समय परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी या फिर कुली के काम के लिए चक्रधरपुर बाजार का रुख करती थीं, लेकिन अब इनकी जिंदगी बदल गई है। घर बैठे बांस से निर्मित अलग-अलग उत्पाद बना प्रतिदिन सैकड़ों रुपये कमा रही हैं। जिंदगी में खुशहाली लौट आई है। हम बात कर रहे हैं प. सिंहभूम के पोड़ाहाट जंगल के नक्सल प्रभावित बंदगांव प्रखंड के लाल बाजार गांव की।

प्रशिक्षण दे खोला गांव की तरक्की का रास्ता : बंदगांव प्रखंड की महिला प्रसार पदाधिकारी आरती कुमारी ने 2010 में सरकार की कौशल विकास योजना के तहत गांव की महिलाओं को रांची ले जाकर प्रशिक्षण दिलाया। इसके बाद पलामू से प्रशिक्षक को बुलाकर गांव की सरस्वती मां महिला समिति और विश्वकर्मा महिला समिति की तीन दर्जन महिलाओं को हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण दिलाया। जिससे कि महिलाएं बांस से निर्मित विभिन्न प्रकार के आकर्षक उत्पाद तैयार कर सकें। प्रशिक्षण के बाद महिला समिति की महिलाएं बांस के उत्पाद बनाती थीं, लेकिन अब चार सौ आबादी वाले गांव की लगभग डेढ़ सौ महिलाएं बांस से निर्मित विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना अपनी जिंदगी संवार रही हैं।

बांस से श्रृंगार बॉक्स सहित अन्य उत्पाद तैयार करती हैं महिलाएं : सरस्वती महिला समिति की अनिता कालिंदी, सरिता कालिंदी, कविता कालिंदी ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद महिलाएं बांस से कई उत्पाद तैयार कर रही हैं। बांस से श्रृंगार बॉक्स, डस्टबिन, टिफिन बॉक्स, फल टोकरी, बास्केट, टेबुल लैम्प, गुलदस्ता स्टैंड, पेन स्टैड सहित अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं।

रांची, दिल्ली और जमशेदपुर में बेचने जाती हैं बांस से तैयार उत्पाद : महिला समिति की सदस्यों ने बताया कि डीआरडीए द्वारा उन्हें मेला लगने पर जानकारी दी जाती है। इसके बाद महिलाएं अपने द्वारा तैयार उत्पाद रांची में लगने वाले उद्योग मेला व सरस मेला के अलावा जमशेदपुर व दिल्ली में ले जाकर बेचती हैं। इसके लिए उन्हें डीआरडीए द्वारा सुविधा मुहैया कराई जाती है। बचे सामान को समूह की महिलाएं जमशेदपुर, रांची सहित अन्य जगहों पर खुद भी जाकर बेचती हैं, जिससे अच्छी-खासी आमदनी होती है।

सरकार हमारे उत्पाद की खरीदारी की व्यवस्था कराती तो बेहतर होता : समितियों का कहना है कि गांव की लगभग सभी महिलाएं अब बांस से तरह-तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं, लेकिन, डीआरडीए द्वारा सिर्फ उन्हें रांची, जमशेदपुर और दिल्ली में लगने वाले मेले में ही उत्पाद बेचने के लिए भेजा जाता है। इसके अलावा अपने सभी उत्पाद को महिलाएं खुद बाजार में जाकर बेचती हैं। अगर सरकार उनके उत्पाद की खरीदारी की व्यवस्था करती तो बेहतर होता और काम में भी बढ़ोतरी के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ जाती।

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  • Web Title:Success Story: Work From Harmless to Life