
पुत्रदा एकदाशी के अवसर पर शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने की विशेष पूजा अर्चना
चक्रधरपुर में पौष एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा अर्चना की। राधा गोविंद मंदिर में विशेष पूजा की गई और भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। महिलाओं ने भगवान से सुख समृद्धि की प्रार्थना की और एकादशी व्रत के महत्व को समझाया, जिसमें संतानों की प्राप्ति की कथा भी शामिल है।
चक्रधरपुर।वर्ष के अंतिम पौष एकादशी अथवा पुत्रदा एकादशी के अवसर पर आज शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर एकादशी व्रत का पालन किया। चक्रधरपुर रेलवे क्षेत्र के पांचमोड़ स्थित राधा गोविंद मंदिर में एकादशी व्रत पालन करने वाले श्रद्धालुओं ने मंदिर में विशेष पूजा अर्चना किया। शाम को मंदिर में भजन कीर्तन और आरती किया जाएगा। उसी प्रकार बालाजी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने एकादशी व्रतधारी महिलाओं ने पूजा अर्चना किया और भगवान से सुख समृद्धि की प्रार्थना की। इसके अलावा शहर के तमाम मंदिरों में एकादशी व्रत के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वैदिक पंचाग के अनुसार पौैष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पौष एकादशी कहा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा और व्रत रखने से संतान प्राप्ति होती है। इसके साथ हर एक दुख-दर्द और पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है। महिलाओं ने सुनी भ्रद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या के एकादशी व्रत करने से पुत्र प्राप्ति की कथा पौष एकादशी अथवा पुत्रदा एकादशी के अवसर पर व्रत करने वाली महिलाओं ने मंदिरों एवं अपने अपने घरों में भद्रावती नामक नगरी के राजा सुकेतुमान की पत्नी रानी शैव्या का कोई संतान नहीं होने के कारण वह हमेशा दुखी रहती थी। उनके पास अपार धन संपदा होने के बाबजूद उसे संतोष नहीं था। राजा को ऋषिमुनियों के द्वारा पुत्रदा एकादशी के बारे में बताने के बाद राजा और रानी के द्वारा पुत्रदा एकादशी व्रत करने के बाद उसे पुत्रधन की प्राप्ति हुई। वह राजकुमार अत्यंत शूरवीर यशस्वी और प्रजापालक हुआ।

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