दिल्ली के टुसू मिलन समारोह का आयोजन
चक्रधरपुर में आदिवासी कुड़मी समाज ने दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू में टुसू मिलन समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में कुड़मी समाज के लोगों ने झारखंडी संस्कृति को संरक्षित करने का संकल्प लिया। युवा आन्दोलनकारी अमित महतो ने पांता नाच के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। समारोह को सफल बनाने में कई लोगों ने योगदान दिया।
चक्रधरपुर।आदिवासी कुड़मी समाज दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू के सांसद क्लब में टुसू मिलन समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें दिल्ली में रहने वाले बड़ी तदाद में कुड़मी समाज के लोग शामिल हुये और झारखंड संस्कृति को बचाने और अगली पीढ़ी तक संरक्षित करने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने कुड़मी समाज का पारंपारिक पांता नांच में शामिल हुये। मौके पर युवा आन्दोलनकारी अमित महतो ने कहा कि झारखंडी संस्कृति को बचाने और संजो कर रखने के लिए इस तरह के आयोजन का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मकर पांता नाच की एक अलग ही विज्ञानीक मान्यता है।
विश्व के विज्ञानीको ने दावा किया है कि अगर महिलाएं गर्भवती अवस्था में या उसके ठीक पहले अगर हाथ पकड़ कर पांता नाच नाचते हैं तो उन महिलाओं के नॉर्मल प्रसव बिना ऑपरेशन के होने की संभावना बढ़ जाती हैं और अब यूनाइटेड नेशन और यूएसए जैसे विकसित देश के डाक्टर नॉर्मन डिलिवरी के लिए गर्भवती महिलाओं को पांता नाच करने का सलाह दे रहें हैं। पुराने ज़माने में भारत के साथ साथ विश्व के अनेकों जनजातिय समुह के महिला लोग मकर पांता नाच से मिलता जुलता नृत्य करते थे। आदिवासी कुड़मी समाज दिल्ली द्वारा करीब एक माह से इसकी तैयारी की जा रही थी। समारोह के एक दिन पहले महिलाओं ने कुङमियों के जनजातीय परब त्योहारों में खाया जाने वाला चावल और गुड से तैयार किया और गुड पीठा को बना कर रखी थी। जिसको मिठाई के रूप में सभी परिवारों को बांटा गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से वियेन महतो,विपिन महतो,बसंत, मुकेश,भागीरथी,पंकज,कृपा शंकर, मदनलाल, भूकल महतो, सुशील आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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