जिले में बच्चों के जन्म के बाद मां को मिल रहा है पोषण आहार पैकेट
चक्रधरपुर में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए कई पोषण योजनाएं चल रही हैं। लेकिन वर्ष भर से पोषण आहार पैकेट की आपूर्ति नहीं होने से वितरण में परेशानी आई है। इससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

चक्रधरपुर, संवाददाता। सरकार कुपोषित बच्चों, स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कई योजनाएं चला रही है, ताकि कुपोषित बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं और उनके बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके। लेकिन चक्रधरपुर सहित पूरे जिले में पोषण आहार पैकेट, टेक होम राशन (टीएचआर) या फिर रेडी टू ईट (आरटीई) का पैकेट एक साल बैकलॉक चल रहा है। स्थिति यह है कि बच्चे के जन्म के कई माह बाद माताओं को रेडी टू ईट का पैकेट मिल रहा है। जुलाई 2025 में गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला रेड टू ईट का पैकेट अप्रैल 2026 में आया है, जिन्हें बच्चे के जन्म के कई माह बाद आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से वितरण किया गया है। अब इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार जिले के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं, कुपोषित बच्चे और किशोरियों के स्वास्थ्य के प्रति कितनी गंभीर है। जबकि पश्चिम सिंहभूम जिला कुपोषित जिलों की सूची में भी शामिल है और इसके लिए सरकार द्वारा कई अतिरिक्त सेल्टर भी संचालित किये जाते हैं।
किसे कितना पैकेट मिलना है :
सरकारी योजना के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के तीन माह बाद से, धात्री माताओं को छह माह तक, स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों 14 से 18 को और कुपोषित बच्चों को प्रति माह चार चार पैकेट देना है। जबकि अति कुपोषित बच्चों को छह पैकेट प्रति माह देने हैं।
विभिन्न मुद्दे :
एक साल से टीएचआर या रेडी टू ईट पैकेट की आपूर्ति नहीं हुई है। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं, किशोरियों और कुपोषित बच्चों के बीच वितरण ठप है。
-बिमला देवी, सीडीपीओ, चक्रधरपुर
सरकार को आंगनबाड़ी केंद्रों से माध्यम से संचालित होने वाली योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को इसका लाभ सही ढंग से मिल सके।
-विजय सिंह सामाड, अध्यक्ष प्रखंड कांग्रेस कमेटी
सामान्य प्रश्न
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