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सोनुवा में झाड़फूंक के चक्कर में डायरिया से दो बच्चे समेत चार की मौत

प. सिंहभूम के पोड़ाहाट अनुमंडल के सोनुवा प्रखंड की लोंजो पंचायत के माईलपीड़ गांव में झाड़फूंक के चक्कर में डायरिया से दो बच्चे समेत चार लोगों की मौत हो गयी। सभी की मौत एक सप्ताह के अंदर हुई है। मृतकों में एक आठ जबकि एक 14 वर्ष का बच्चा शामिल है।

माईलपीड़ में लगातार मौत से मचा कोहराम : लोंजो पंचायत के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्र के माईलपीड़ गांव में लगातार मौत से कोहराम मच गया है। गत गुरुवार को हंगरा सोय के 14 वर्षीय पुत्र सिंगराय सोय को कई बार उल्टी-दस्त हुई और उसकी मौत हो गई। वहीं, शनिवार को सेलाय सोय के आठ वर्षीय पुत्र सुनाय सोय की भी उल्टी-दस्त के बाद मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार दोपहर में उल्टी-दस्त से 50 वर्षीय तुरी बोदरा व रात में 35 वर्षीय विवाहिता जेमा सोय की भी मौत हो गई। मृतकों में सिंगराय व सुनाय एक ही परिवार के सदस्य हैं।

चार मौत से सहमें ग्रामीण, पहुंचे अस्पताल : मंगलवार को भी एक पुरुष व एक महिला की मौत के साथ अन्य कई लोग भी उल्टी-दस्त से पीड़ित हो गए। इसके बाद गांव में दहशत फैल गया। बुधवार दोपहर उल्टी-दस्त से पीड़ित कुछ लोग सोनुवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार भर्ती : इधर, मौत की सूचना मिलने के बाद बुधवार दोपहर स्वास्थ्य केंद्र की एक टीम गांव पहुंची और चार मरीजों 13 वर्षीय मछुवा बोदरा, चार वर्षीय जोबना सोय, छह वर्षीय बुरसी सोय व 22 वर्षीय डांगो बोदरा को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, मेडिकल टीम ने ग्रामीणों की जांच कर दवाएं दीं।

चुआं का पानी पीने को विवश हैं ग्रामीण : माईलपीड़ गांव में करीब 60 परिवार रहते हैं, लेकिन एक भी चापाकल नहीं है। गांव के 60 परिवारों के करीब दो सौ लोग चुआं का ही पानी पीते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें चुएं का गंदा पानी पीना मजबूरी है। गांव काफी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण वहां पर बिजली, पेयजल आदि बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।

मरीजों में मिली दस्त की शिकायत : सोनुवा सामुदायिक केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ नरेश बास्के ने बताया कि अस्पताल में इलाजरत चार मरीजों में दस्त की शिकायत पायी गयी है। चुएं का गंदा पानी पीने के बाद डायरिया फैलने से संभवत: चार लोगों की मौतें हुई हैं। उन्होंने बताया कि गांव पर नजर रखी जा रहा है। गुरुवार सुबह एक मेडिकल टीम जाकर स्थिति को देखेगी।

झाड़फूंक कर रहे थे ग्रामीण :डायरिया से पीड़ित होने के बाद भी ग्रामीण अस्पताल आने की बजाय देवी देवता का प्रकोप मानकर झाड़फूंक के चक्कर में फंस गये, जिस कारण लोगों की मौतें हुईं। सोनुवा अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. नरेश बास्के ने कहा कि बुखार, उल्टी-दस्त सहित कुछ भी होने पर लोग सीधे अस्पताल पहुंच कर इलाज करायें, झाड़फूंक के चक्कर में नहीं फंसे। अगर झाड़फूंक के चक्कर में फंसते हैं तो लोगों की जान जा सकती है।

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  • Web Title:Four children, including two children, died due to dizziness in Sonuva