आदिवासी उरांव समाज का खददी फग्गू पर्व 5 मार्च को
चाईबासा 26 फरवरी फ़ाइल संख्या 15 आदिवासी उरांव समाज का 5 मार्च को खददी

चाईबासा। आदिवासी एवं समाज संघ की एक बैठक स्थानीय पुलहातू कुड़ुख सामुदायिक भवन में हुई। संचु तिर्की की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य विषय उरांव समाज का पारंपरिक त्योहार खददी फग्गू के संबंध में विचार विमर्श करना था। ज्ञातव्य है कि प्रत्येक वर्ष होली (धूलंडी) के दूसरे दिन खददी फग्गू त्योहार मनाने की परंपरा रही है। उपस्थित पंचों ने विचार-विमर्श के बाद कैलेंडर तिथि के अनुसार होली के दूसरे दिन अर्थात चैत्र मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि (5 मार्च) को मनाने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि 3 मार्च को पूर्णिमा होलिका दहन एवं 4 मार्च 2026 को होली है।
अध्यक्ष संचू तिर्की ने कहा कि 5 मार्च को सभी नेग नियम के साथ खददी फग्गू का त्योहार मनाया जाएगा। सचिव अनिल लकड़ा ने कहा कि चूंकि होली के दूसरे दिन इस त्योहार को मनाया जाता है इसलिए इसे छोटी होली और कुड़ुँख में खददी फग्गू कहा जाता है। इस दिन समाज के लोग अपने चाला टोंका पूजा स्थल में एकत्रित होकर ईष्ट देवी देवता की पूजा अर्चना करते हैं। इस त्योहार को नववर्ष का शुभ आगमन भी माना जाता है। इस दौरान जंगल से साल वृक्ष के नई-नई फूल पत्तियों को अपने इष्ट देवी देवता को अर्पित किया जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद सभी रंग-गुलाल के साथ एक दूसरे संग छोटी होली मनाते हैं और एक दूसरे को त्योहार एवं नव वर्ष की बधाइयां देते हैं। मुख्य सलाहकार सहदेव किस्पोट्टा ने खददी फग्गू त्योहार को पूरे विधि विधान एवं पारंपरिक ढंग से मनाने का आह्वान किया। अंत में उपसचिव लालू कुजूर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। बैठक में बाबूलाल बरहा, लक्ष्मण बरहा, दुर्गा खलखो, मंगल खलखो, महावीर बरहा, कृष्णा टोप्पो, सुमित बरहा, बिक्रम खलखो, राजकमल लकड़ा, गणेश कच्छप, पंकज खलखो, चंदन कच्छप, दुर्गा कुजूर, किरण नुनिया, विजयलक्ष्मी लकड़ा, मालती लकड़ा, लक्ष्मी कच्छप, निर्मला लकड़ा, लक्ष्मी बरहा, सावित्री कच्छप, तिजो तिर्की, ननकी लकड़ा आदि उपस्थित थे।
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