वनभुजरी पर्व पर वन देवी की पूजा, सामूहिकता की दिखी मिसाल
गुवा। गुवासाई गांव में आदिवासी समाज के लोगों ने रविवार को पारंपरिक आस्था और उत्साह के साथ वनभुजरी पर्व मनाया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने वन देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। पूजा के बाद सभी लोग सामूहिक रूप से भोजन तैयार किया।
गुवा। गुवासाई गांव में आदिवासी समाज के लोगों ने रविवार को पारंपरिक आस्था और उत्साह के साथ वनभुजरी पर्व मनाया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने वन देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। पूरे गांव में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला।
पारंपरिक रीति-रिवाज
पूजा के बाद गांव के सभी लोग अपने-अपने घरों के बाहर पेड़ों के नीचे एकत्रित हुए और सामूहिक रूप से भोजन तैयार किया। परंपरा के अनुसार इस दिन किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है, बल्कि सभी लोग प्रकृति के सानिध्य में एक साथ भोजन बनाते और ग्रहण करते हैं। इस दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की सहभागिता रही, जिससे आपसी भाईचारा और एकता की भावना मजबूत हुई।
आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा
गांव के देवरी सुशील पूर्ति ने बताया कि वनभुजरी पर्व आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व प्रकृति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और सामूहिक जीवन शैली को मजबूत करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इस दिन वन देवी की पूजा कर गांव की रक्षा और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। इस अवसर पर सुशील पूर्ति, चंद्र मोहन पूर्ति, लांगो पूर्ति, लंका पूर्ति, जगमोहन पूर्ति सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। पर्व के माध्यम से गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों का संरक्षण और सामाजिक एकता की सुंदर झलक देखने को मिली।
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