किरीबुरू अस्पताल की रेफरल व्यवस्था पर उठे सवाल
किरीबुरू अस्पताल की रेफरल व्यवस्था पर उठे सवाल
ब इस बंदी का कारण अस्पताल की रेफरल व्यवस्था में गंभीर खामियां और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाने से एक कर्मचारी की मौत बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार किरीबुरू खदान में कार्यरत एक अधिकारी ड्यूटी जाने के दौरान ब्रेन स्ट्रोक से कोमा में चले गए थे। उन्हें अपोलो अस्पताल, भुवनेश्वर रेफर किया गया। उपचार के दौरान नियमानुसार दो लाख रुपये की सीमा समाप्त होने के बाद रेफरल रिन्यू किया जाना था, लेकिन सेल प्रबंधन एवं किरीबुरू अस्पताल द्वारा समय पर आवश्यक रेफरल कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके चलते अपोलो अस्पताल ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया और परिजन अपने खर्च पर इलाज कराते रहे।
मृत्यु वाले दिन भी रेफरल की मांग की गई, पर अस्पताल द्वारा यह कहकर इंकार कर दिया गया कि नो पेशेंट, नो रेफर। इस घटना से आक्रोशित कर्मचारियों ने रात्रि पाली में ही खदान बंद कर दी। बंदी में इंटक, एटक, एचएमएस, बीएमएस, सीटू, झारखंड मजदूर यूनियन एवं झरखेड़ा मजदूर संघर्ष संघ सहित सभी यूनियन शामिल रहीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रात करीब एक बजे महाप्रबंधक खान पी.आर. शिरपुरकर, सीजीएम एचआर डी. मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी साइट पर पहुंचे और कर्मचारियों व यूनियन प्रतिनिधियों से वार्ता की। प्रबंधन ने ईडी माइंस से बात कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। यूनियनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था, फिर भी रेफरल में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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