सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ धरना-प्रदर्शन
चाईबासा में झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा ने सदर अस्पताल की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और ब्लड बैंक के बंद होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि सरकार एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई करे, अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।

चाईबासा, संवाददाता। सदर अस्पताल की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था के विरुद्ध मंगलवार को झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष माधव चंद्र कुंकल के नेतृत्व में लोगों ने पुराने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकार के लिए संघर्षरत कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन और आम नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेयांश समड ने कहा कि सदर अस्पताल गरीबों की आखिरी उम्मीद है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग यहां इलाज कराने आते हैं, लेकिन छोटी-मोटी बीमारी के लिए भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, जो उनके साथ घोर अन्याय है。
स्वास्थ्य अधिकार की मांग
सृजन टीम के सदस्य शंकर चत्तोंबा ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए। खूंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने दुख जताते हुए कहा चाईबासा स्थित ब्लड बैंक विगत 8 महीनों से लाइसेंस के अभाव में बंद पड़ा है। स्वास्थ्य मंत्री इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर पाए हैं, जो उनकी घोर लापरवाही को दर्शाता है। झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी कि मांगों पर एक सप्ताह के अंदर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा उच्च स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। मौके पर भगवान सवैया, राहुल बिरुवा, मनोज गोप, किशोर सवैया, पूजा सवैया, वीरसिंह बिरूली, महेंद्र जमुदा, वीरसिंह बालमुचू, दूसरु कुंकल, जगदीश बिरुवा, शांति हेंब्रम, मीनाक्षी हेम्ब्रम, संगीता देवगम, उदय सिंह बारी, दुबराज मारडी, तुरी सुंडी, रमेश जेराई, सुरेश सवैया समेत कई लोग मौजूद थे।
धार्मिक मांगें
ये हैं मांगे : ब्लड बैंक का तुरंत अपग्रेड कर सुचारू रूप से चालू और नियमित 3 माह में ऑडिट करें। ब्लड बैंक को 3 शिफ्ट में चलाया जाए एवं टेक्नीशियन की संख्या हर शिफ्ट में 4 होनी चाहिए। रात्रि पाली में इमरजेंसी वार्ड में कार्यरत डॉक्टर को ही वार्ड के मरीजों के आपात स्थिति होने पर सेवा देना पड़ता है, इस कमी को अभिलंब व्यवस्थित कर समुचित सेवा दिया जाए। यूएसजी प्रत्येक दिन अनिवार्य करें, सीटी स्कैन, एमआरआई मशीन की सेवा अभिलंब चालू किया जाए। सभी गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को स्थाई नियुक्ति की जाए। आईसीयू, बर्न वार्ड, लेबर रूम और सुरक्षा व्यवस्था का उन्नयन। 24×7 इमरजेंसी, लेबर रूम एवं आईसीयू सुविधाओं का विस्तार। एचआईवी पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और आजीवन इलाज और परिवार के एक एक सदस्य को अस्पताल परिसर में स्थाई नौकरी। जेल कार्ड इनक्यूबेटर और सेंट्रीफ्यूज से मरीजों का क्रॉस मैचिंग कराया जाए। मरीजों में रिएक्शन को देखते हुए स्लाइड विधि को अभिलंब रोक लगा दिया जाए। पोस्टमार्टम के दौरान पीड़ित परिवारों से मनमानी रकम न वसूली जाय एवं चार्ज मिले डॉक्टर को समय अनुसार उपस्थित होने कहा जाए। रजिस्ट्रेशन काउंटर को ग्रामीण क्षेत्रों से आए ग्रामीणों के लिए पूर्व की तरह सरल और सुलभ बनाया जाए। जिले के इतने बड़े सदर अस्पताल के जिला लैब में सारा जांच क्यों नहीं हो रहा है। एचबीए 1सी नहीं हो रहा है एलएफटी एवं थायरॉइड प्रोफाइल और भी बहुत सारा जांच नहीं हो रहा है। इसे अभिलंब चालू किया जाए। 700 बेड वाले अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को जमीन और स्ट्रेचर में इलाज बंद हो। ब्रेकडाउन पड़े सभी एम्बुलेंस की मरम्मती कर तत्काल सेवा उपलब्ध करें एवं सभी एम्बुलेंस चालकों , टेक्निशियनों को अभिलंब नियमित मानदेय भुगतान किया जाए। पर्याप्त संख्या में स्थायी डॉक्टर, विशेषज्ञ एवं पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति। सभी आवश्यक दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद एवं पुराने उपकरणों की मरम्मत। नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन। प्रखंड स्तर पर मौजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा पंचायत स्तर पर मौजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी गर्भवती महिलाओं का डिलीवरी हो। कई बार देखा गया है कि सदर अस्पताल से गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए रेफर कर दिया जाता है। सदर अस्पताल में हाथ पैर टूट जाने वाले मरीजों का प्लास्टर तक नहीं किया जाता है और एमजीएम या रिम्स रेफर कर दिया जाता है।
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