
रामतीर्थ धाम श्रद्धालुओं के लिए तैयार, लगेगा विशाल मेला
मकर संक्रांति के मौके पर रामतीर्थ धाम पूरी तरह सज-धज कर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है। 14 जनवरी को यहां विशाल मेला आयोजित किया जाएगा। सुरक्षा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया है। रामतीर्थ धाम को धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है, जहां भगवान राम ने शिवलिंग की स्थापना की थी।
जगन्नाथपुर, संवाददाता। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर रामतीर्थ धाम पूरी तरह सज-धज कर श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार है। मानेश्वरम (रामेश्वरम) मंदिर समिति की ओर से मकर पर्व को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। स्नान घाट की साफ-सफाई, मंदिर प्रांगण की स्वच्छता, रंग-रोगन और पूजा-अर्चना की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष सनत प्रधान ने बताया कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर रामतीर्थ धाम में विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले को लेकर सुरक्षा, स्वच्छता और पूजा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
रामतीर्थ धाम में बहने वाली वैतरणी नदी का मनोरम दृश्य श्रद्धालुओं को खासा आकर्षित कर रहा है। चट्टानों से टकराकर बहता कल-कल करता स्वच्छ जल, नदी के दोनों ओर फैला हरा-भरा घास का मैदान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मकर पर्व पर झारखंड और ओडिशा से सैकड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचकर स्नान व पूजा-अर्चना करते हैं। दूर-दराज से आए लोग परिवार के साथ पूजा कर मेले का आनंद उठाते हैं। रामेश्वरम शिव मंदिर समिति ने पूरे धाम को दुल्हन की तरह सजाया है। घाट की सफाई, महिला स्नान घरों की व्यवस्था, मंदिर परिसर की स्वच्छता और पूजा सामग्री की समुचित व्यवस्था की गई है। धार्मिक महत्व : रामतीर्थ धाम को तीन मंदिरों का गांव कहा जाता है। यहां रामेश्वरम शिव मंदिर, सीता-राम मंदिर और जगन्नाथ मंदिर एक ही परिसर में स्थित हैं। इस घाट को ‘स्वर्ग द्वार’ की मान्यता प्राप्त है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐतिहासिक महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम वनवास के दौरान कुछ समय रामतीर्थ धाम में ठहरे थे। उन्होंने अपने हाथों से शिवलिंग की स्थापना कर उसकी पूजा की थी। यहां भगवान राम के पदचिह्न मिलने की भी मान्यता है, जो इस धाम के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाती है। कैसे पहुंचें : रामतीर्थ धाम पहुंचने के लिए जैंतगढ़ से नोवामुंडी सड़क मार्ग पर लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय कर देव गांव पहुंचा जा सकता है। वहां से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर रामतीर्थ धाम स्थित है। मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धा, आस्था और प्रकृति की छटा से सजा रामतीर्थ धाम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति देने को तैयार है। मेले में सुरक्षा की व्यवस्था की पूरी : जगन्नाथपुर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी सत्यम कुमार ने बताया कि मेले में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन मौजूद रहेंगे। वहीं, कमेटी के वॉलिंटियर मेले की निगरानी करेंगे। नदी में डुबकी लगाने आए श्रद्धालुओं के साथ कोई अनहोनी न हो इसके लिए गोताखोर एवं नाव की व्यवस्था की गई है। पूरे मेले में प्रशासन की कड़ी निगरानी रहेगी।

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