ग्रामसभा में नहीं पहुंची महिला, परिणाम बेनतीजा
चाईबासा में सुनीता बानरा द्वारा जमीन पर दावा किया गया है। उनकी शिकायत पर मामले को ग्रामसभा में सुलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन महिला बैठक में नहीं आई। केंद्रीय कमेटी ने महिलाओं के अधिकारों पर प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि शादी के बाद उनके माता-पिता के घर में कोई अधिकार नहीं रहता।

चाईबासा, संवाददाता। नरसंडा संकोसाई की महिला सुनीता बानरा द्वारा जमीन पर दावा किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में महिला द्वारा अपनी बड़ी मां जीरामनी सुन्डी आंगनबाड़ी सेविका के विरुद्ध मुफस्सिल थाना में लिखित रूप से शिकायत की गई है। जब यह मामला कोल्हान पोड़ाहाट मानकी मुंडा संघ केंद्रीय कमेटी व न्याय पंच के संज्ञान में आया तो सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी से संपर्क कर इस मामले को ग्रामसभा स्तर से निपटाने के लिए रेफर किया गया। इसके तहत रविवार को नरसंडा पंचायत भवन में ग्राम मुंडा ध्रुवा सुन्डी की अध्यक्षता में न्याय पंच एवं मानकी मुंडा केंद्रीय कमेटी की उपस्थिति में बैठक हुई। लेकिन फोन पर कई बार संपर्क किए जाने के बावजूद वादी पक्ष बैठक में नहीं पहुंची, जिस कारण मामले का समाधान नहीं किया जा सका। महिला को ग्रामसभा में लाने का प्रयास जारी है। उनके रिश्तेदारों को इसके लिए जिम्मेदारी दी गई है。
महिलाओं के अधिकार
केंद्रीय कमेटी के अध्यक्ष गणेश पाट पिंगुवा, मानकी व महासचिव चंदन होनहागा ने पारंपरिक मानकी मुंडा व्यवस्था एवं सीएनटी एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि शादी के बाद महिलाओं का अपने माता-पिता के घर जमीन व खतियान पर हक अधिकार नहीं बनता, बल्कि बेटी-बहनों के साथ मधुर संबंध बना रहता है। शादी होने के बाद महिलाओं को अपने ससुराल में जमीन के साथ-साथ जीवन यापन का सारा अधिकार स्वत: प्राप्त हो जाता है। जब तक लड़कियां शादी नहीं करती वैसे कुंवारी लड़कियों को अपने माता-पिता के घर में पुरुषों की तरह रहने व जीवन यापन का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में ग्रामीण जमीन से संबंधित मामलों में थाना पहुंचते हैं। पुलिस को मानकी मुंडा से संपर्क कर मामले को सुलझाना चाहिए। ताकि गांव देहात के गरीब लाचार थाना एवं कोर्ट की परैशानी में ना पड़ें।
रूढ़िवादी प्रथा
न्याय पंच के अध्यक्ष दलपत देवगम ने कहा कि महिलाओं का शादी होने के बाद अपने माता-पिता के घर जमीन या खतियान पर कोई अधिकार नहीं रह जाता। कुंवारी लड़कियों को अपने माता-पिता के घर जीवन यापन व रहने का पूरा अधिकार है। इसके लिए उन्हें एक पर्सेंट जमीन रहने वह खेती के लिए देने का प्रावधान है। जरूरत पड़ने पर इलाज या विकट परिस्थितियों में कुंवारी लड़कियों को भी अनुमति व सहमति लेकर थोड़ा जमीन बेचने का अधिकार है। लेकिन कुंवारी लड़कियां जैसे ही शादी कर लेती हैं या मर जाती हैं तो उस संपत्ति का हकदार उनके भाइयों या भाई नहीं होने पर कुर्सी नामा के आधार पर वंशज होते हैं। महिलाओं का अधिकार सीमित है। पूर्वजों की जमीन को दूसरे कास्ट, दूसरे टाइटल एवं दूसरे वंशज के लोगों से बचाने के लिए यह रूढ़िवादी प्रथा हमारे पूर्वजों ने बनाई थी। जो आदिकाल से चली आ रही है, आदिवासी परंपरा को जीवित रखने व उनकी जमीन को सुरक्षित रखने के लिए ही सीएनटी एक्ट बना है। मौके पर टोंटो गांव के ग्रामीण मुंडा सुरेंद्र बानरा,नरसंडा मुखिया श्रीराम सुन्डी व उप मुखिया सहित काफी संख्या में ग्रामीण, आंगनबाड़ी सेविका एवं द्वितीय पक्ष के लोग मौजूद रहे।
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