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20 जनवरी, 2021|10:59|IST

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हो नृत्य के बारे में मिली जानकारी

हो नृत्य के बारे में मिली जानकारी

चाईबासा, संवाददाता

पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं सांस्कृतिक कार्य निर्देशालय झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय हो लोक गीत एवं नृत्य कार्यशाला में सोमवार को शिक्षक डोबरो बुढ़ीउली ने हो नृत्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हो नृत्य के चार रुप हैं। इसमें इतिछाता नृत्य- दशहरा पर्व नृत्य के नाम से जाना जाता है। इसमें लंबी कतार होती है। ये नृत्य को युद्ध नृत्य भी कहा जाता है। होरो वर्प नृत्य- धान छिटने के समय को होरो पर्व नृत्य का नाम दिया गया है। बहा पर्व नृत्य-माघे पर्व के बाद जब नया फूल खिलता है तो यह नृत्य किया जाता है। आदी सुसुन शादी में यह नृत्य को नाचा जाता है।