सारंडा मुठभेड़ के बाद मानवता की जीत: नक्सली के माता-पिता को पुलिस ने दिया सम्मान
सारंडा के जंगलों में हुई मुठभेड़ में 17 नक्सली मारे गए। एक नक्सली रापा मुंडा के माता-पिता के साथ पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाई। माता-पिता ने बेटे का शव लेने से इनकार किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें समझाया कि वे दोषी नहीं हैं। अंततः माता-पिता ने शव स्वीकार किया और पुलिस ने उन्हें भोजन और कंबल प्रदान किया।

सारंडा के घने जंगलों में हुई बड़ी मुठभेड़ में 17 नक्सलियों के मारे जाने की खबर जहां देशभर में सुर्खियां बनी, वहीं इस घटना के बाद सामने आई एक मानवीय तस्वीर ने लोगों के दिलों को छू लिया है। मुठभेड़ के दौरान मारे गए कुख्यात इनामी नक्सली रापा मुंडा उर्फ रापा बोदरा उर्फ पावेल के माता-पिता के साथ किरीबुरू पुलिस द्वारा किया गया व्यवहार पूरे कोल्हान क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुठभेड़ के बाद नक्सली की पहचान होने पर उसके शव के अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। कई मामलों में ऐसे शव लावारिस रह जाते हैं, लेकिन किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक अलग पहल की।
उनके निर्देश पर विशेष वाहन भेजकर उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के टोपकोई गांव से नक्सली के माता-पिता और ग्रामीणों को थाना बुलाया गया। थाना परिसर में वृद्ध माता-पिता बेहद टूटे हुए नजर आए। उन्होंने अपने ही बेटे का शव लेने से इनकार करते हुए कहा कि जिस बेटे ने गलत रास्ता चुना, उसका शरीर वे कैसे स्वीकार करें। इस पर थाना प्रभारी रोहित कुमार ने उन्हें समझाया कि बेटे की गलती के लिए माता-पिता दोषी नहीं होते और उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए। काफी देर तक चली बातचीत के बाद माता-पिता बेटे का शव लेने के लिए तैयार हुए। इसके बाद पुलिस टीम ने उन्हें भोजन कराया, ठंड से बचाव के लिए कंबल प्रदान किए और पूरे सम्मान के साथ विदा किया। यह घटना दिखाती है कि कठोर परिस्थितियों में भी पुलिस का मानवीय चेहरा समाज के लिए भरोसे और संवेदना का संदेश देता है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




