जबरन वाहन जब्ती, अवैध वसूली और उत्पीड़न पर फाइनेंस कंपनी को झटका
चाईबासा, संवाददाता। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाहन फाइनेंस से जुड़े गंभीर मामले में फाइनेंस कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उपभोक्ता के पक

चाईबासा । जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाहन फाइनेंस से जुड़े गंभीर मामले में फाइनेंस कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मामले में आयोग ने मानसिक पीड़ा, अपमान और उत्पीड़न के लिए 75 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। क्या है मामला शिकायतकर्ता ने 10 मार्च, 2022 को महिंद्रा बोलेरो वाहन फाइनेंस कराया था। वाहन की मासिक किस्त (ईएमआई) 12 हजार, 220 रुपए निर्धारित थी, जिसे शिकायतकर्ता नियमित रूप से जमा कर रहा था। जुलाई 2024 में वाहन के दुर्घटना ग्रस्त हो जाने के कारण वह तीन माह (जुलाई–सितंबर 2024) की किस्त जमा नहीं कर सका।
19 सितंबर, 2024 को जब शिकायतकर्ता बेटी के इलाज के लिए जा रहा था, तभी फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट वहां पहुंचे और कथित रूप से बदसलूकी व जबरदस्ती करते हुए वाहन छीन लिया। अतिरिक्त 44 हजार जोड़ने पर भड़का आयोग आयोग ने पाया कि फाइनेंस कंपनी यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि 44 हजार अतिरिक्त कैसे जोड़े गए। इसके अलावा, कंपनी के एजेंट को जमा कराए गए 7 हजार रुपए का भी कोई समुचित समायोजन नहीं दिखाया गया। उपभोक्ता को हुई परेशानी के लिए कंपनी पर लगाया जुर्माना उपभोक्ता आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए फाइनेंस कंपनी को ऋण खाते की पुनर्गणना (री-कैलकुलेशन) वास्तविक बकाया के अनुसार करने का निर्देश दिया।
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