कोल्हान रक्षा संघ ने कोल्हान दिवस पर निकाला जुलूस

Feb 18, 2026 02:25 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, चाईबासा
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कोल्हान रक्षा संघ के द्वारा 'कोल्हान दिवस' समारोह का आयोजन जगन्नाथपुर में हुआ। सैकड़ों महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। मुख्य अतिथि माइकल तिरिया ने कोल विद्रोह और उसके प्रभाव पर चर्चा की। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिसमें पारंपरिक नृत्य और गीत शामिल थे।

कोल्हान रक्षा संघ ने कोल्हान दिवस पर निकाला जुलूस

जगन्नाथपुर, संवाददाता। कोल्हान रक्षा संघ केंद्रीय कमिटी की ओर से मंगलवार को प्रखंड कार्यालय के पीछे स्थित फुटबॉल मैदान में “कोल्हान दिवस” समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न गांवों से सैकड़ों महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में उत्साह और जोश का माहौल देखने को मिला। समारोह की शुरुआत शिशु मंदिर के समीप लोगों के जुटने से हुई। इसके बाद सभी प्रतिभागी मुख्य सड़क से होते हुए जुलूस की शक्ल में फुटबॉल मैदान पहुंचे। जुलूस में शामिल लोगों के हाथों में पारंपरिक हथियार, तीर-धनुष एवं डंडे थे, जो उनकी सांस्कृतिक विरासत और स्वाभिमान का प्रतीक बनकर उभर रहे थे।

“कोल्हान एकता जिंदाबाद”, “विल्किंसन रूल जिंदाबाद”, “कोल्हान रक्षा संघ जिंदाबाद” और “कोल्हान के मानकी-मुंडा जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित संघ के केंद्रीय अध्यक्ष माइकल तिरिया ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के दमनात्मक रवैये के खिलाफ हुए ऐतिहासिक कोल विद्रोह ने कोल्हान के आदिवासी-मूलवासी समाज को विशिष्ट संवैधानिक अधिकार दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बताया कि 1947 में देश की आजादी के बाद भारत आजादी अधिनियम 1947 लागू हुआ, जिसके तहत कोल्हान गवर्मेंट इस्टेट की विशिष्ट प्रशासनिक व्यवस्था को बरकरार रखा गया। उन्होंने कहा कि इंडियन एक्ट 1935 के सेक्शन-92 की व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए संविधान के अनुच्छेद-372 के तहत कोल्हान की स्वायत्तशासी व्यवस्था को मान्यता दी गई है। माइकल तिरिया ने “विल्किंसन रूल” और “पेसा कानून” की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि ये कानून आदिवासी समाज की जमीन, जल, जंगल और परंपरागत शासन व्यवस्था की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने वन क्षेत्रों में बसे लोगों को वनपट्टा प्रदान करने, परती जमीन की बंदोबस्ती तथा ग्राम सभा को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को मिले अधिकारों की सही जानकारी और उसके प्रभावी उपयोग से ही क्षेत्र का समग्र विकास संभव है। सभा को संबोधित करते हुए संघ के संगठन सचिव जयसिंह सुंडी समेत अन्य वक्ताओं ने भी कोल्हान की ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि कोल्हान दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के संकल्प का दिन है। समारोह के अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिसमें पारंपरिक नृत्य और गीतों ने लोगों को भावविभोर कर दिया।

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