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वन व वन्य प्राणियों के प्रति सहिष्णुता का संदेश देगा वन नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर

चाईबासा वन प्रमंडल द्वारा जल्द ही शहर वासियों को घूमने फिरने, मनोरंजन और जानकारी देने के लिए नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर के रूप में एक बड़ी सौगात देने...

वन व वन्य प्राणियों के प्रति सहिष्णुता का संदेश देगा वन नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर
हिन्दुस्तान टीम,चाईबासाMon, 27 May 2024 05:30 PM
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चाईबासा, संवाददाता। चाईबासा वन प्रमंडल द्वारा जल्द ही शहर वासियों को घूमने फिरने, मनोरंजन और जानकारी देने के लिए नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर के रूप में एक बड़ी सौगात देने की तैयारी की जा रही है। इस सेंटर को मूर्त रूप देने का कार्य सेंटर फॉर एनवायरमेंटल एजुकेशन की अहमदाबाद टीम के द्वारा पूरे जोर-शोर से किया जा रहा है। टाटा स्टील के सौजन्य से बन रहे इस केंद्र की विशेषता यह होगी कि इसके माध्यम से आम जनों को जंगल के महत्व की जानकारी और जंगल को बचाने को बचाने की प्रेरणा मिलेगी। जंगली जानवरों विशेष कर सारंडा के हाथियों को लेकर आम जनों को जागृत करना मुख्य उद्देश्य है।
इस नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर में विश्व के वायो डाइवर्सिटी को लेकर सारंडा जंगल के बायोडायवर्सिटी को एक साथ प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। इसमें वनस्पतियों के साथ-साथ दुर्लभ वनस्पतियों जंगल के जानवरों विशेष कर हाथियों को लेकर विशेष रूप से फोकस किया गया है। खासकर भारतीय और अफ्रीकन हाथियों के बीच यह देखने को मिलेगा। इस इंटरप्रिटेशन सेंटर में ऐसे तो सारे जगह ही देखने और जानकारी बढ़ाने की योग्य है, पर यहां पर बनाए जा रहे सेंट्रल डायोरामा विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। इसमें त्री आयामी तकनीक के माध्यम से हाथियों को अपने बच्चों के साथ घूमते-फिरते दिखाया जाना एक आकर्षण का केंद्र रहेगा। कुल मिलाकर नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर से आने वाले आगंतुकों को झारखंड के 2000 वर्षों के पुराने इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। झारखंड की संस्कृति तथा विभिन्न आयामों से भी लोग रूबरू हो सकेंगे। केंद्र में आने वाले हर आयु वर्ग के बच्चों के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक जानकारी से भी रूबरू होने को मिलेगा। इस केंद्र के चारों ओर आउटफिल्ड को एक पिकनिक स्पॉट के रूप में तैयार किया जा रहा है, ताकि आने वाले लोगो को न केवल देखने को कोई चीज मिले बल्कि ज्ञानवर्धक और मनोरंजन हो, पूरी तरह से इसका भी पूरा ख्याल रखा गया है। चाईबासा वन प्रमंडल के अधिकारी सत्यम कुमार ने बताया कि यहां आने वाले लोगों विशेष कर कॉलेज के छात्र-छात्राओं को प्राकृतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन, वन एवं वन्य प्राणियों के प्रति सहिष्णुता और झारखंड के जनजातीय समाज की जानकारी मिलेगी।

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