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चाईबासा

12 बच्चियों का मनोहरपुर व बच्चों का किरीबुरू में होगा नामांकन

हिन्दुस्तान टीम,चाईबासाPublished By: Newswrap
Fri, 28 Aug 2020 09:54 PM
12 बच्चियों का मनोहरपुर व बच्चों का किरीबुरू में होगा नामांकन

सारंडा के बीहड़ जंगलों में स्थित रिंगारिंग गांव में एक गैर सरकारी संस्था इंस्पायर द्वारा संचालित विद्यालय के बच्चियों का नामांकन मनोहरपुर स्थित समर्थ बालिका उच्च विद्यालय तथा कक्षा 6 से 8 में पढ़ने वाले बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूल में कराया जाएगा। बच्चे किरीबुरू में इंस्पायर संस्था के छात्रावास में रहेंगे और वहीं, सरकारी स्कूल में पढ़ाई करेंगे। शुक्रवार को डीईओ नीरजा कुजूर टीम के साथ रिंगारिंग गांव पहुंची और वहां पर इंस्पायर संस्था द्वारा संचालित स्कूल को देखा और बच्चों से भी बात की।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री के पहल पर इस गांव में कोल्हान के आयुक्त, डीआईजी, पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त, एसपी सहित जिले के वरीय पदाधिकारी पहुंचे थे। गांव में मूलभूत सुविधाओं के अभाव और बच्चों के पठन-पाठन की समुचित व्यवस्था नहीं होने की स्थिति से अवगत हुए थे। इसके बाद इस दिशा में प्रयास शुरू हो गया है। इसी क्र में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उक्त गांव में पहुंच कर बच्चों के पठन पाठन की व्यवस्था की है।

रिंगारिंग के विद्यालय में 60 बच्चे अध्ययनरत हैं : वन विभाग के क्षेत्र में स्थित रिंगारिंग गांव में कोई सरकारी विद्यालय नहीं है। यहां पर इंस्पायर संस्था द्वारा संचालित विद्यालय में 60 बच्चे, जो रिंगारिंग, बोदड़ाबट्टी तथा नुईयागडा गांव के रहने वाले हैं। वे यहां पढ़ाई करते हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि बच्चों को शिक्षा के रूप में ब्रिज कोर्स कराया जाता है, यानि बच्चों को उम्र के अनुसार उन्हें कक्षा के अनुरूप तैयार किया जाता है। हालांकि बच्चों को संस्था द्वारा कोई सुविधा नहीं दी जाती ऐसे में विभाग यह तय कर रहा है कि उन्हें कौन-कौन सी सुविधा दी जाए ताकि जो बच्चे हैं वे अच्छे से पढाई कर सके।

पुरानी किताबों का होगा वितरण : जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि बच्चे पढ़ाई करें इसके लिए उनके पास किताबों का होना जरूरी है। इसलिए परियोजना में जो भी पुरानी किताबे होंगी या फिर जो नई किताबे बच गई होंगी उन्हें बच्चों के बीच जल्द ही वितरण किया जाएगा, ताकि इन 60 बच्चों को शिक्षा के मुख्यधारा से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि मनोहरपुर तथा किरीबुरू में नामांकित होने वाले बच्चों के बाद कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले बच्चों के लिए वहां किताबों के साथ-साथ उनके लिए शेड की भी व्यवस्था की जाएगी ताकि किसी भी मौसम में उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो और उनकी पढ़ाई होती रहे।

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