रांची में नया बवाल, अब सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र भड़के; भूख हड़ताल पर बैठे

हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड की राजधानी रांची में नया बवाल शुरू हो गया है। अब केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र भड़क उठे हैं। खराब खाने को लेकर चार छात्रावासों के करीब एक हजार छात्र धरने पर बैठ गए। दो छात्रों ने तो भूख हड़ताल शुरू कर दी है। छात्रों का कहना है कि मेस की फीस बढ़ाने के बाद भी अच्छा भोजन नहीं दिया जा रहा है।

रांची में केंद्रीय विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू किया।
रांची में केंद्रीय विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू किया।

रांची में अब केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के छात्र भड़क उठे हैं। मेस के भोजन की गुणवत्ता को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। रविवार को चार छात्रावासों के लगभग एक हजार विद्यार्थी मेस में खराब भोजन मिलने और शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में धरने पर बैठ गए। इस दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मेस व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग की। यहां तक कि व्यवस्था के खिलाफ दो छात्र अंकित कुमार और मृत्युंजय कुमार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। धरने पर बैठे विद्यार्थियों का कहना था कि मेस के भोजन की गुणवत्ता में सुधार की मांग वे लंबे समय से करते आ रहे हैं। समय-समय पर आंदोलन भी हुआ, लेकिन हर बार विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आश्वासन देकर मामला शांत करा दिया गया। इस बार विद्यार्थी स्थायी समाधान की मांग पर अड़े हैं।

छात्रों का आरोप है कि पहले करीब 3300 रुपये मासिक शुल्क में भोजन की व्यवस्था की जा रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 3700 रुपये कर दिया गया। शुल्क बढ़ने के बावजूद भोजन की गुणवत्ता नहीं सुधरी। छात्रों ने मांग की कि शुल्क को कम किया जाए और उसी दर पर बेहतर और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए।

विद्यार्थियों ने मेस में प्रोफेशनल कुक नियुक्त करने की भी मांग की। उनका कहना था कि खाना बनानेवाले कर्मचारियों की व्यवस्था में भी बदलाव किया जाना चाहिए और उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट की जानी चाहिए। छात्रों ने मेस के भोजन, साफ-सफाई और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी की मांग रखी। साथ ही, मेस के मेन्यू में भी बदलाव और नियमित रिविजन की मांग की। मेस की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। विद्यार्थियों का आरोप था कि किचन और भोजन तैयार करने की जगह पर स्वच्छता का समुचित ध्यान नहीं रखा जाता। कई बार खाने में कीड़े, बाल या अन्य चीजें मिलने की शिकायत भी सामने आती रही है।

अलग-अलग छात्रों से वार्ता का भी विरोध

प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने इस बात का भी विरोध किया कि उनकी समस्याओं पर कुछ चुनिंदा छात्रों को अलग से बुलाकर बातचीत कर ली जाती है। छात्रों का कहना था कि हॉस्टल और मेस से जुड़े मुद्दे सभी विद्यार्थियों के सामने रखकर ही हल किए जाने चाहिए। उन्होंने सामूहिक रूप से वार्ता और निर्णय लेने की मांग की।

समझाने का प्रयास किया

हंगामे के बाद हॉस्टल के वार्डन डॉ सुभाष कुमार बैठा और असिस्टेंट डीएसडब्ल्यू डॉ कोंचक ताशी धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को विद्यार्थियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों पर चर्चा की जाएगी और समाधान निकालने का प्रयास होगा। अधिकारियों ने तब तक धरना समाप्त करने की अपील की। लेकिन, विद्यार्थी अपनी मांग पर कायम रहे। उनका कहना था कि पूर्व में भी इसी तरह आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए इस बार लिखित अथवा ठोस निर्णय के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी

विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ अनुराग लिंडा ने कहा कि पिछले करीब दो सप्ताह से मेस व्यवस्था को सुचारू करने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर लगातार बैठक चल रही है। उन्होंने बताया कि पहले विद्यार्थियों को करीब 3300 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था, लेकिन संबंधित टेंडर की अवधि समाप्त हो गई है। नए टेंडर की प्रक्रिया में समय लगने के कारण तत्काल व्यवस्था के तहत वर्तमान व्यवस्था शुरू की गई है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रयास किया कि विद्यार्थियों को पुरानी दर के आसपास ही गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए बीआईटी मेसरा, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद सहित अन्य संस्थानों से भी संपर्क किया गया, लेकिन इस दर पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए कोई एजेंसी तैयार नहीं हुई। इसके बाद करीब 3700 रुपये और जीएसटी अतिरिक्त, की दर तय की गई। उन्होंने भरोसा जताया कि सोमवार को विद्यार्थियों के साथ बैठक कर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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