
झारखंड में गजब है! 7 साल पहले 52 लाख में खरीदी, अब 22 लाख में खरीदी जा रही मशीन
संक्षेप: अब यह मशीन पिछली मशीन की तुलना में लगभग 30 लाख कम कीमत पर मात्र 22 लाख रुपए में खरीदी जा रही है। इस भारी अंतर ने अस्पताल की पिछली खरीद पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सी-आर्म मशीन की खरीद को लेकर हलचल मची है। सात साल पहले यह मशीन 52 लाख में खरीदी गई। अब यह मशीन पिछली मशीन की तुलना में लगभग 30 लाख कम कीमत पर मात्र 22 लाख रुपए में खरीदी जा रही है। इस भारी अंतर ने अस्पताल की पिछली खरीद पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बता दें कि पुरानी मशीन सात साल पहले एक साल की वारंटी के साथ खरीदी गई। पिछले दिनों वह मशीन खराब हो गई थी। मरम्मत नहीं होने की स्थिति में अस्पताल प्रबंधन ने जैम पोर्टल से नई मशीन खरीदी। नई मशीन पिछली मशीन की तुलना में आधे से भी कम कीमत पर तीन साल की वारंटी में आ रही है। यह मामला डॉक्टर और कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। नई मशीन को लेकर अधिकारियों का दावा है कि अस्पताल प्रबंधन ने सबसे लेटेस्ट सी-आर्म मशीन की खरीदारी की है।
पुरानी मशीन की खरीद में कमीशन की आशंका
नई मशीन का रेट पता चलने के बाद पिछली सी-आर्म मशीन की खरीद में कमीशन की आशंका जताई जा रही है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक चिकित्सक ने बताया कि वर्षों से यहां दो-तीन लोग ही मशीन और उपकरण की आपूर्ति कर रहे थे। वे अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से टेंडर में मनमाना रेट डालकर ऊंचे दाम पर मशीन की आपूर्ति करते थे। पिछले दस साल के मशीन की आपूर्ति और उसके रेट की जांच होने पर बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। नई सी-आर्म मशीन का रेट खुलने के बाद काफी चीजें स्पष्ट हो रही हैं।
सिंडिकेट को लगा बड़ा झटका
सी-आर्म मशीन की खरीदारी से मेडिकल कॉलेज में वर्षों से जमे ठेकेदारों के सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है। यहां मशीन व उपकरण की आपूर्ति पर कुछ एजेंसियों का कब्जा था। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से मनमानी चलती थी। मनमानी का आलम यह रहा कि पिछले दिनों अस्पताल प्रबंधन के कई टेंडर को पूरा नहीं होने दिया गया, जिसमें एक्स-रे फिल्म से लेकर सी-आर्म मशीन तक शामिल थी। इसके बाद प्रबंधन ने जैम पोर्टल से सी-आर्म मशीन की खरीदारी कर सिंडिकेट को बड़ा झटका दिया है।
इंप्लांट और दवाओं के टेंडर पर विवाद
इंप्लांट और दवा की खरीद के टेंडर को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है। टेंडर में सिंडिकेट की नहीं चल रही है। नए प्लेयर मैदान में आए और काफी हद तक मैदान मार भी लिया। टेंडर का प्राइस बिड खुलने के बाद कई पुराने आपूर्तिकर्ता टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं और रद्द करने की मांग कर रहे हैं। वहीं बाकी लोगों का कहना है कि आपत्ति प्री बिड मीटिंग में उठनी चाहिए थी। प्राइवेट बिड खुलने के बाद सभी का प्राइस ओपन हो गया। ऐसे में टेंडर कैंसिल करना नियम विरुद्ध होगा।





