तापमान में बढ़ोतरी के साथ ग्रामीण क्षेत्र में जल संकट गहराया,विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं

Newswrap हिन्दुस्तान, बोकारो
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चास क्षेत्र में 500 से अधिक चापाकल पाइप के अभाव में बेकार हो गए हैं। गर्मी के चलते जल स्तर तेजी से गिर रहा है और ग्रामीणों को पानी की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जलापूर्ति योजना में कोई सुधार नहीं हुआ है।

तापमान में बढ़ोतरी के साथ ग्रामीण क्षेत्र में जल संकट गहराया,विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं

चास प्रतिनिधि। शहर व सटे ग्रामीण क्षेत्र में 5 सौ से अधिक चापाकल पाईप के अभाव में बेकार हो गया है। विगत कुछ दिनो से बढ़े तापमान में प्रखंड क्षेत्र में जलस्तर तेजी से नीचे गिरने लगा है। पंचायतवार खराब चापाकलो के मरम्मति को लेकर पीएचडी विभाग की चापाकल मरम्मति दल क्षेत्र में कार्य करने की जानकारी दी जा रही है। लेकिन क्षेत्रीय स्थिति और ग्रामीणों की माने तो तापमान बढ़ने के साथ अधिकांश चापाकलों से पानी निकलना बंद हो गया है। गांव के चापाकलो से लोगो को पानी नही मिल पाने की शिकायत है। ग्रामीणो की माने तो चापाकलों में पाइप डाले जाने के बजाय ऊपरी मरम्मति किया जा रहा है।

जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। जिसमें कुरा, भंडरो, पिंड्राजोरा, सतनपूर, चौदाहा, बिजुलिया, कनारी, रानीपोखर, बाटबिनोर, पुंडरू आदि गांव शामिल है। बिजुलिया पंचायत के मुखिया बासूदेव रजवार ने कहा लाखों रूपया जल मीनार पर खर्च होने के बावजूद अब पंचायत के ग्रामीणों को योजना से पानी नही मिल पाया है। जबकि 40 लाख रूपया से अधिक की राशि जल व्यवस्था पर खर्च हुई थी। पंचायत में जल जीवन मिशन योजना के तहत जल मीनार का काम कहीं थमा हुआ है, तो कहीं केवल ढांचा बना है, जिससे गर्मी के मौसम में महिलाओं को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।दूर दराज से पानी जुगाड़ करने को विवश ग्रामीण : प्रखंड के विभिन्न पंचायत गांव में ग्रामीण जलापूर्ति योजना से भी सभी गांवों में पानी नही मिलने व विभिन्न पंचायत गांव में लाखों रूपये की लागत से बना जल मीनार अब तक चालू नही हो सका है। जिसमें प्रखंड के बिजुलिया पंचायत सहित सटे विभिन्न गांव शामिल है। कुछ पंचायत में सोलर सहित अन्य योजना से पाईपलाईन व्यवस्था पर लाखों रूपया खर्चा किया गया। लेकिन इससे ग्रामीणो को लाभ मिलने के बजाय अब तक पानी मिलने की आश्वासन ही मिलती आ रही है। दस से अधिक पंचायत गांव में जल मिनार बनने के बाद बेकार हो गया है। ऐसे में ग्रामीण दूर दराज से पानी जुगाड़ करने को विवश है। 15 वें वित्त में अधिकांश योजना जल व्यवस्था पर ही खर्च किया गया था, लेकिन गर्मी के शुरुआती तापमान से ही ग्रामीण क्षेत्र में जल संकट को लेकर त्राहि-त्राहि होने लगा है।वर्जन पेयजल व्यवस्था पर विशेष योजना के तहत काम होगा। सभी पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक करते हुए पंचायत गांव में पेयजल व्यवस्था सहित खराब चापाकलों का सूची लिया जाएगा। 15 वें वित्त में जल व्यवस्था पर खर्च योजनाओं का जांच करेंगे।- प्रदीप कुमार, बीडीओ, चास

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