शहीद सदानंद झा की 52वां शहादत दिवस मनाया गया
चंदनकियारी में शहीद सदानंद झा स्मारक समिति ने उनके 52 वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि दी। किसान नेता जगन्नाथ रजवार ने बताया कि झा मजदूर आंदोलन के प्रमुख नेता थे और उनके आंदोलनों के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया था। 11 मार्च 1974 को उनकी हत्या कर दी गई थी, जिससे गोमो में दंगा हुआ।

चंदनकियारी, प्रतिनिधि । शहीद सदानंद झा स्मारक समिति की ओर से बुधवार को सदानंद झा की 52 वीं शहादत दिवस पर चंदनकियारी में उनके चित्र पर श्रद्धांजलि दी गई। अध्यक्षता सुधीर शर्मा व संचालन राजीव रंजन झा ने किया। किसान नेता जगन्नाथ रजवार ने कहा कि सदानंद झा गोमो में रेलवे के टंडेल के पद पर रहते हुए मजदूर संगठन से जुड़े थे। कुछ ही समय में वे मजदूरों के प्रखर नेता बन गए थे । गोमो में शहीद सदानंद झा अपने आंदोलनों की वजह से जाने जाते थे। उनके आंदोलन के बारे में कहा जाता है कि एक बार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था तो उनकी रिहाई के लिए महिलाओं ने रेल का चक्का तक जाम कर दिया था।
जब डीसी ने उन्हें बिना शर्त छोड़ा तब जाकर आंदोलन समाप्त हुआ। अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में सबसे पहले शहीद होने वाले शहीद सदानंद झा ही थे लोकप्रियता एवं मजदूर आंदोलन के कारण वे कुछ लोगों के नजर पर चढ़ गए थे। कुछ समय बाद वे उनके आंखों की किरकिरी बन गए थे। 11 मार्च 1974 को उन्हें घर से बुलाकर रेलवे ग्राउंड के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के बाद गोमो में दंगा की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। जिसे किसी तरह से प्रशासन ने काबू किया था। गोमो में कभी भी किसी नेता की बात उठती है तो सर्व प्रथम शहीद सदानंद झा की बात आती है। मौके पर झामुमो संस्थापक सदस्य दुर्गा चरण महतो, नेपाल दास, मानिक चन्द्र महतो, परमेश्वर महतो, सुधीर रजवार माले नेता दुलाल प्रमाणिक आदि शामिल रहे।
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