
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल की मौत
संक्षेप: पेटरवार में एक सड़क हादसे में दिलेश्वर ठाकुर की मौत हो गई। वह अपने घर लौटते समय ट्रेलर की चपेट में आया और गंभीर रूप से घायल हुआ। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। दिलेश्वर परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, जिससे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा।
पेटरवार। पेटरवार पुलिस ने सड़क हादसे में हुई मौत के बाद शुक्रवार को मृतक युवक के शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए न केवल अनुमंडलीय अस्पताल तेनुघाट भेज दिया। बल्कि पोस्टमार्टम कराकर मृतक युवक के शव को उसके परिजनों के हवाले कर दिया। मृतक युवक का शव शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराकर जैसे ही मृतक युवक के गांव थाना क्षेत्र के पतकी पंचायत के मिर्जापुर गांव पहुंचा, वैसे ही परिजन चीत्कार कर उठे। परिजनों के चीत्कार से गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। क्या था मामला: थाना क्षेत्र के पतकी पंचायत के मिर्जापुर गांव निवासी दुखन ठाकुर के पुत्र दिलेश्वर ठाकुर उर्फ डब्लू ठाकुर(34 वर्ष) गुरुवार की रात्रि पौने आठ बजे पेटरवार तेनुचौक में अपनी सैलून दुकान को बढ़ाकर अपनी बाइक से एन एच 23 पेटरवार मुख्य चौक को क्रॉस कर अपने घर मिर्जापुर जा रहा था, तभी रामगढ़ से चलकर बोकारो की ओर जा रही एक ट्रेलर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया, जिसके कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।

पेटरवार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हेमलता तिग्गा ने सदर अस्पताल बोकारो रेफर कर दिया था। परिजन गंभीर रूप से घायल युवक को इलाज के लिए बोकारो जेनरल अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। बी जी एच पहुंचने पर चिकित्सक ने जांचोंपरांत उसे मृत घोषित कर दिया था। परिवार का था एकमात्र कमाऊ सदस्य: मृतक युवक अपने घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, वह पेटरवार तेनुचौक में सैलून दुकान चलाकर अपने माता यशोदा देवी, पिता दुखन ठाकुर, पत्नी, दो बेटे और मृतक छोटे भाई की पत्नी और बच्चों का किसी तरह परवरिश किया करता था। एकमात्र कमाऊ सदस्य की मौत के बाद उसके परिजनों को झकझोर कर रख दिया। परिवार वाले इस सदमें में है कि अब उनका खेवनहार कौन होगा। गौरतलब है कि मृतक युवक के छोटे भाई की मौत एक हादसे में तीन वर्ष पूर्व हो गयी थी और तब से अबतक अपने परिवार का भरण पोषण करते आ रहा था। 108 एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध होती तो बच सकती थी जान: घटना के आधे घंटे के बाद भी गंभीर रूप से घायल युवक को 108 एम्बुलेंस की सुविधा नही मिल पाई, नही तो युवक की जान बचाई जा सकती थी। 108 एम्बुलेंस सेवा में परिजनों ने आधे घंटे से 108 एम्बुलेंस के लिए कॉल किया लेकिन एम्बुलेंस उपलब्ध नही हो पाई।

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