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27 जनवरी, 2020|12:46|IST

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आज का आदमी बहुत चालाक हो गया है...

आज का आदमी बहुत चालाक हो गया है...

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की ओर से इस्पातांचल स्वदेशी मेला में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

डॉ परमेश्वर भारती की अध्यक्षता व डॉ सत्यदेव तिवारी के संचालन में आयोजित इस कवि सम्मेलन में कवि रामनारायण उपाध्याय, उषा झा, अरुण पाठक, सुनील मोहन ठाकुर, राजीव कंठ, डॉ रंजना श्रीवास्तव, डॉ नरेन्द्र कुमार राय, गंगेश पाठक, वकील दीक्षित, कस्तूरी सिन्हा, कुणाल पंडित, दयानंद सिंह, दीनानाथ ठाकुर, राजवीर शर्मा, मनीष कुमार, सुभद्रा कुमारी, गीता कुमारी, अंजली सोरेन, जगनारायण ज्योति, डॉ योगेन्द्र मुसहर आदि ने काव्यपाठ कर श्रोताओं को आनंदित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी। कवि सम्मेलन का प्रारंभ कुणाल पंडित के मंगलाचरण पाठ से हुआ। पत्पश्चात् उन्होंने कविता ‘भेदो छाती देश दुश्मन की‘, दयानंद सिंह ने ‘वह कौन है जो निडर, शांत और मौन है़.़, उषा झा ने ‘नारी जग की जननी है‘, अरुण पाठक ने ‘राजनीति की शान थे अटल, संसद की पहचान थे अटल‘, रामनारायण उपाध्यय ने भोजपुरी कविता ‘हम ज्योतिष हैं, तू के ह‘, सुनील मोहन ठाकुर ने मैथिली कविता ‘हकार दैत छी‘, वासुदेव पांडेय ने ‘मैं शरहद तेरी छोड़ चला‘, गंगेश पाठक ने ‘सूरज अभी डूबा नहीं है, जरा सी शाम होने दो, मंै खुद लौट कर आउंगा, जरा सा नाकाम होने दो़., डॉ रंजना श्रीवास्तव ने ‘नारी है कोमल और कठोर, नारी बिन नर का कहां है ठौर‘, सत्यदेव तिवारी ने ‘आज का आदमी बहुत चालाक हो गया है़., राजीव कंठ ने मैथिली कविता ‘गोवा व हिन्दी कविता ‘हौसला रखिए समंदर मिलेगा़.़, सुभद्रा कुमारी ने ‘तुम होते कौन हो मुझे जज करनेवाले़, गीता कुमारी ने ‘भारत की नारी दुर्गा है, काली है, सदा सदा से हमने मूल्यों को पाला है‘ डॉ नरेन्द्र कुमार राय ने ‘देश द्रोहियों सुनो सुनो, छाती पर मूंग दलेंगें हम, सुनाकर सबकी वाहवाही लूटी।

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