हराय पर्व: मांदर की थाप पर थिरके विधायक

Jan 10, 2026 12:39 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बोकारो
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सोहराय पर्व, आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रतीक, बेरमो विधानसभा क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में मांदर की थाप पर नाचते-गाते पशुधन की पूजा की। इस अवसर पर चरपा रोटी का विशेष महत्व था, जिसे सभी ने मिलकर बनाया और खाया।

हराय पर्व: मांदर की थाप पर थिरके विधायक

बेरमो। आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रतीक सोहराय पर्व शुक्रवार को बेरमो विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आदिवासी‌ बहुल गांवों में सोल्लास मनाया गया। धनकटनी के बाद मनाये जाने वाले प्रकृति व पशुधन के संरक्षण के इस पर्व को स्त्री-पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में मांदर की‌ थाप पर नाचते-गाते मनाया। इस मौके पर गाय, बैल, भैंसें जैसे पशुधन के प्रति आभार प्रकट करने के लिए ग्रामीणों ने पशुओं को नहला व सजा कर उन्हें अच्छा चारा देकर अपने संथाल समाज के आराध्य सहित पशुधन की पूजा की। लोकनृत्य पर नाचते-गाते सोहराय पर्व मनाया गया। पेटरवार प्रखंड के मायापुर में झामुमो जिलाअध्यक्ष रतन लाल मांझी के निजी आवास में सोहराय पर्व में विधायक कुमार जयमंगल ऊर्फ अनुप सिंह सहित डीसी अजय नाथ झा व एसपी हरविंदर सिंह ने खुद मांदर बजाया व थाप पर थिरके।

विधायक ने कहा कि सोहराय पर्व आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। डीसी व एसपी ने कहा कि यह त्योहार संथालियों की सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक है। बेरमो एसडीओ मुकेश कुमार मछुवा, जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अभय प्रसाद, सिटी डीएसपी आलोक रंजन, पेटरवार सीओ अशोक राम, झामुमो जिला सचिव मुकेश कुमार महतो, मंटू यादव, मनोहर मुर्मू, घुंनु हांसदा, मो इकबाल, पान बाबू केवट, नाम किशोर मांझी आदि थे। जरीडीह प्रखंड के तांतरी दक्षिणी के निर्मलडीह में युवा समाजसेवी राजेश मरांडी के यहां सोहराय पर्व पर लोग जुटे। मोहन किस्कू, अनिल मांझी आदि थे। चन्द्रपुरा प्रखंड के आदिवासी बहुल गांव बुढीडीह, जिलपु बेड़ा, बाधमारी टांड़, परसाडीह, बांधघुटू आदि गांवों में सोहराय पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। मांदर की थाप पर बरद खुंटा के साथ यह संपन्न हो गया। इसके पूर्व मांझी गोविंद मूर्मू नायके हाड़ाम सरकार मुर्मू व कुडाम नायके हीरालाल टुडू ने संयुक्त रूप से संथाली रीति-रिवाज के साथ ग्राम देवता की पूजा अर्चना कर गांव ग्राम की सुख समृद्धि की कामना की। मुखिया प्रतिनिधि ब्रह्मदेव हेम्ब्रम, समाज के दुखन मुर्मू, रंजीत हांसदा, रामकुमार मुर्मू, गुप्ता मुर्मू, रुपलाल टुडू आदि ने संयुक्त रूप से बताया कि सोहराय सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि यह जीवन दर्शन का संदेश देने वाला अवसर भी है। सोहराय पर्व पर चरपा रोटी का विशेष महत्व है। इसको प्राय: हर आदिवासी घर में बनाने का रिवाज है। चंद्रपुरा के गांवों में शुक्रवार को चरपा रोटी बनाई गई और सभी ने चाव से इसे खाया। सोहराय पर इसे प्रमुख भोजन माना जाता है। चरपा रोटी चावल के पाउडर को मीट या चिकेन के छोटे टुकड़े में मिलाकर बनाया जाता है। जो लोग इस त्योहार में आमंत्रित होते हैं उनको भी इसे खिलाया जाता है। चंद्रपुरा के आदिवासी व विस्थापित नेता लखी हेंबरम ने बताया कि सोहराय पर इसका बनना बहुत ही जरूरी है। संताली आदिवासी परिवार में चरपा बनाया जाता है और सभी इसे मिलकर खाते हैं। पड़ोस में भी इसे बांटा जाता है। सोहराय पर्व का समापन शनिवार को नाच गान के साथ होगा।

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