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मोबाइल की रोशनी में मरीज की डायलिसिस

लाइट कटते ही पंखे और लाइट पूरी से बंद हो जाते हैं। सेंटर में अंधेरा छा जाता है। ऐसे में मरीजों को टॉर्च और मोबाइल के सहारे डायलिसिस की जाती है। वहां इलाजरत मरीजों ने बताया कि उन्हें डायलिसिस के लिए वहां भर्ती कराया गया, लेकिन ऐसा लग रहा है कि बिना पंखे की गर्मी में इलाज से पहले ही उनका दम घुट जाएगा। आपको बता दें कि काफी प्रयास के बाद सदर अस्पताल में पांच बेड का डायलिसिस सेंटर पीपी मोड पर बहाल किया गया, लेकिन बेहतर व्यवस्था नहीं होने के कारण सेंटर का सही ढंग से संचालन नहीं हो रहा है। सेंटर में एक प्राइवेट डॉक्टर और तीन टेक्नीशियन कार्यरत हैं। एक शिफ्ट में यहां प्रतिदिन पांच मरीजों की डायलिसिस की जाती है। भीषण गर्मी में एसी तो दूर पंखा भी नसीब नहीं : डायलिसिस सेंटर में आम तौर पर एसी की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन यहां मरीजों को पंखा भी नसीब नहीं हो रहा है। राहत के लिए कागज और कूट का पंखा बनाकर मरीज गर्मी झेलने को विवश हैं।

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  • Web Title:Sadar Hospital: Patients getting mobile