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इंसान का कर्म ही उसकी पहचान बनाता है: योगेंद्र सिंह

इंसान का कर्म ही उसकी पहचान बनाता है:  योगेंद्र सिंह

1 / 2इंसान का कर्म ही उसकी पहचान तय करता है। करगिल युद्ध में उनके काम ने उनकी पहचान तय की, ठीक उसी प्रकार आपको आपके कर्म ही पहचान देंगे। उक्त बातें सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को कहीं। परमवीर...

इंसान का कर्म ही उसकी पहचान बनाता है:  योगेंद्र सिंह

2 / 2इंसान का कर्म ही उसकी पहचान तय करता है। करगिल युद्ध में उनके काम ने उनकी पहचान तय की, ठीक उसी प्रकार आपको आपके कर्म ही पहचान देंगे। उक्त बातें सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को कहीं। परमवीर...

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इंसान का कर्म ही उसकी पहचान तय करता है। करगिल युद्ध में उनके काम ने उनकी पहचान तय की, ठीक उसी प्रकार आपको आपके कर्म ही पहचान देंगे। उक्त बातें सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को कहीं। परमवीर चक्र विजेता सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को बोकारो क्लब में आयोजित मां तुझे सलाम-गाथा एक शौर्य कार्यक्रम में शहरवासियों के बीच अपने अनुभव साझा कर रहे थे। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उस समय हालात बहुत खराब थे। 16,500 फुट ऊंचा टाइगर हिल बर्फ से पूरी तरह से ढका था। बर्फीली तूफान के बीच पहाड़ी पर चढ़ना आसान नहीं था। पाकिस्तानी सेना ऊंचाई पर थी। दिन में पाकिस्तानी सैनिक किसी को भी निशाना बना लेती थी। इसके लिए रात में ऊंचाई पर चढ़ने का निर्णय लिया गया। पांच घंटे तक लगातार फायरिंग की, जब बहुत कम मात्रा में हथियार बचे, तो हमने रणनीति बनाई। एकदम से शांत हो गए और दुश्मन का इंतजार करने लगे।

दिन के करीब बारह बजे पाकिस्तान के ग्यारह से बारह सैनिक देखने आए कि भारत के कितने जवान बचे हैं। वे जैसे ही दिखे हमने एक साथ हमला बोला और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। एक बच गया और उसने दुश्मन को जानकारी दे दी। इसके बाद तीस से पैंतीस पाक सैनिकों ने दोबारा हमला किया, ऊपर से पत्थर फेंकें, हमारे कई साथी शहीद हो गए। उनके लिए मैं भी मर चुका था, लेकिन मैंने सोच लिया था कि मैं उफ तक नहीं करूंगा। ग्रेनेड का एक हिस्सा पैर में लगा और जख्मी हो गया। सूबेदार ने बताया कि हमें विश्वास था कि अपने साथियों तक बात पहुंचाने के लिए कुछ भी हो, जिंदा रहना है। जबतक सीने या सिर में गोली नहीं लगेगी, तबतक वे जीवित रहेंगे।

जब सीने में मारी गोली: पाकिस्तानी सैनिक उनके पास पहुंचे और शहीद हुए जवानों पर गोलियां दागीं। उनपर भी गोलियां चलाईं। उनके हाथ और पैरों में गोलियां मारीं। इसके बाद सीने पर गोली चलाई, लेकिन जेब में रखे पांच रुपए के सिक्कों ने उनकी जान बचा ली। इसके बाद पाकिस्तानी सैनिक उनके और उनके साथियों के हथियार लूट ले गए। उन्होंने बताया कि 17 गोलियां लगने के बाद वे बेहोश हो रहे थे। कुछ दिख नहीं रहा था, तभी एक पाकिस्तानी सैनिक का पैर उनके पैर से टकराया, तो उन्हें अहसास हुआ कि वे जिंदा हैं। उन्होंने सोचा कि अब तक जीवित हूं, तो जिंदा ही रहूंगा। योगेंद्र बताते हैं कि दुश्मनों ने नीचे मेरी पोस्ट पर हमला करने की रणनीति बनाई थी। उनकी आवाज जब उनकी कान में पड़ी, तो उन्हें लगा कि उनकी टुकड़ी खत्म हो जाएगी। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे उन्हें इतनी शक्ति दे दे कि वे अपने साथियों तक सूचना पहुंचा सकें। योगेंद्र उठ खड़े हुए और ठान लिया कि वे लड़ेंगे और दुश्मनों को मारेंगे। योगेंद्र बताते हैं कि भारतीय सैनिकों के हथियार लूटकर जा रही पाकिस्तानी सैनिकों पर उन्होंने ग्रेनेड फेंका। इससे कई पाक सैनिकों की मौत हो गई। जो बचे, वे भागकर छिप गए। उन्हें लगा कि भारतीय सेना आ गई है। योगेंद्र के पास पाकिस्तानी सैनिकों के हथियार आ गए। उनका बायां हाथ और दोनों पैर गोलियों से छलनी हो चुके थे। उन्होंने अपना हाथ उखाड़कर फेंकने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए। इसके बाद हाथ को पीठ पर टिका दिया और लेटकर एक हाथ से हथियार चलाने लगे। जान पर खेलकर पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। उन्होंने पाकिस्तान के तीन बंकरों पर कब्जा किया। मौके पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के महासचिव राकेश मिश्रा, सांसद पीएन सिंह, विधायक बिरंची नारायण के साथ कई पूर्व सैनिक, एनसीसी कैडेट और विभिन्न स्कूलों के बच्चे उपस्थित थे।

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  • Web Title:Man's karma only makes his identity: Yogendra Singh