मजदूरों पर पुलिसिया कार्रवाई का सीटू ने किया विरोध
उत्तर भारत के नोएडा, गुरुग्राम और मानेसर में मजदूरों पर पुलिसिया दमन के विरोध में सीटू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। मजदूर कम वेतन और ठेका प्रथा के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां की हैं। सीटू ने सरकार से दमन रोकने और न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये तय करने की मांग की।

उत्तर भारत के नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों पर हो रहे कथित पुलिसिया दमन और गिरफ्तारियों के विरोध में सीटू ने गोमिया स्थित आईईएल कार्यालय में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रेस वार्ता के दौरान सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर और राज्य कमेटी सदस्य राकेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के कई औद्योगिक इलाकों में मजदूर कम वेतन और ठेका प्रथा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांगों को सुनने के बजाय पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीटू कार्यकर्ताओं समेत कई मजदूरों को जेल में डाला गया है।
नेताओं ने बताया कि इन क्षेत्रों में मजदूरों को मात्र दस हजार से 13 हज़ार रुपये तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि उनसे 12 घंटे तक काम कराया जाता है। ओवरटाइम और बोनस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं, जिससे मजदूरों को मजबूरी में करीब 333 रुपये प्रतिदिन पर काम करना पड़ रहा है। सीटू ने इस कार्रवाई को मजदूरों के अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि यह केवल औद्योगिक विवाद नहीं, बल्कि मजदूरों के आंदोलन को दबाकर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने की साजिश है। संगठन ने सरकार से मांग की कि मजदूरों पर हो रहे दमन और गिरफ्तारियों को तुरंत रोका जाए तथा न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये तय करने के साथ 8 घंटे कार्यदिवस सुनिश्चित किया जाए। सीटू जिला कमेटी सदस्य शंकर पासवान, अजय कुमार नायक, धनंजय कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
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