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कसमार:कुड़मालि भाखि-चारि जागरण अखाड़ा

कुड़मी समुदाय के बीच कुड़मालि, भाषा, संस्कृति और नेगाचारिक परंपरा बचाए रखने के लिए प्रखंड के सिंहपुर स्थित इंटर महाविद्यालय के सभागार में रविवार को कुड़मालि भाखि-चारि जागरन जडुआहि अखाड़ा आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षक मेघनाथ महतो तथा संचालक महादेव डुंगरियार ने किया। मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रो डॉ बीएन महतो ने कहा कि आदिवासी कुड़मी समुदाय की अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान रही है। कुड़मी समुदाय का इतिहास काफी गौरवपूर्ण रहा है। हमारी अपनी भाषा कुड़माली, धर्म प्रकृति सरना और संस्कृति हमारा त्योहार करमा, सोहराय, टुसू आदि है। हमारी सारी परंपरा और रीति-रिवाज प्राचीन है। हमारी संस्कृति वैदिक नहीं है। हम पूर्णरूप से मूलनिवासी हैं। कुड़मी समाज को साजिश के तहत ब्रिटिश शासन के समय आदिवासी की सूची से बाहर कर दिया गया। कहा कि आने वाले कुछ दिनों में सरकार द्वारा कुड़मी समुदायों के बीच सर्वे करने के लिए जनजातीय शोध संस्थान की टीम कुड़मी बहुल गांव जाएगी, तो उन्हें अपनी प्राचीन परंपरा और संस्कृति को ही बताएंगे, अन्यथा गलत बताने पर हमारी समुदाय एक बार फिर भूल का शिकार होगी। डॉ राकेश साखुआर, छोटेलाल महतो, तरनि बानुहाड़, बैजनाथ मुतरूआर, पलटू ने भी कुड़मी समदुय के भाखि-चारि व परंपरा की जानकारी दी। मौके पर प्रथम कुमार, संतोष महतो, केदार महतो, गणपत काडुआर, दीपक कुमार, जगदीश चंद्रा, वाणेश्वर महतो, अनंत महतो, सुरेंद्र महतो, गिरीवर महतो, कपिलेश्वर महतो, धनुलाल महतो, संजय महतो, भोलानाथ महतो, महेंद्र अमरनाथ आदि मौजूद थे।

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  • Web Title:Ksamar: Kudmali Bhakhi-Chari Jagran Akhara