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रेलवे में नौकरी पाकर दिव्यांग माणिक बना अपने वृद्ध माता - पिता का खेवनहार

पेटरवार फोटो 01 मानिकचंद रामरेलवे में नौकरी पाकर दिव्यांग माणिक बना अपने वृद्ध माता - पिता का खेवनहाररेलवे में नौकरी पाकर दिव्यांग माणिक बना अपने...

रेलवे में नौकरी पाकर दिव्यांग माणिक बना अपने वृद्ध माता - पिता का खेवनहार
हिन्दुस्तान टीम,बोकारोThu, 22 Feb 2024 07:15 PM
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दिव्यांगता को दर किनार करते हुए आखिरकार नेत्र से दिव्यांग माणिक चंद राम ने रेलवे में नियोजन पाकर अपने वृद्ध माता -पिता का खेवनहार बन ही गया। फिलवक्त माणिक चक्रधरपुर रेलवे में हेल्फर है। माणिक के माता-पिता ने पुत्र को लेकर जो सपना देखा था, वह पूर्णरूप से साकार हो गया। पेटरवार की बुंडू पंचायत के मंदिर टोला निवासी चुरामन राम और गीता देवी का इकलौता पुत्र माणिक चंद राम ने रेलवे रिक्यूमेंट सेल (आरसीसी) की परीक्षा में सफलता हासिल की है। मानिकचंद ने इसका सारा श्रेय अपने माता- पिता और गुरुजनों को दिया है। मानिकचंद के पिता चुरामन राम मोटरसाइकिल मिस्त्री हैं। लेकिन, अपने पुत्र की पढ़ाई-लिखाई में कभी पीछे नहीं रहे और स्तंभ की तरह खड़े होकर नेत्रहीन पुत्र को उच्च शिक्षा दिलाई। जिसकी बदौलत आज माणिक इस मुकाम तक पहुंचने में सफल रहा।

मानिकचंद के पिता चुरामन राम ने बताया कि पुत्र बचपन से ही नेत्र से 80 फीसदी नेत्रहीन है। उसका इलाज चक्षु चिकित्सालय पेटरवार के विख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ डीके गुप्ता, बोकारो के डॉ. भिंडे, हजारीबाग के डॉ एलके दयाल, रांची के डॉ बीपी कश्यप, अमृतसर के डॉ. दलजीत सिंह के अलावा शंकर नेत्रालय मद्रास में भी इलाज कराया। लेकिन, कोई असर नहीं हुआ।

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