पड़ताल एसएनसीयू में छह बेड पर 15 नवजात है भर्ती, नवजातों की जिंदगी से खिलवाड़
पड़ताल एसएनसीयू में छह बेड पर 15 नवजात है भर्ती, नवजातों की जिंदगी से खिलवाड़पड़ताल एसएनसीयू में छह बेड पर 15 नवजात है भर्ती, नवजातों की जिंदगी से खिलवाड़

सदर अस्पताल का स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू ) की स्थिति बदहाल है। एक बेड पर दो से तीन नवजात को एक साथ रखा गया है। एसएनसीयू में फिलहाल 15 नवजात भर्ती है। लेकिन एसएनसीयू में नवजातों को खतरनाक स्थिति में रखा जा रहा है। सोमवार को पड़ताल के दौरान एसएनसीयू का ऐसा नजारा देखा गया। आलम यह था कि एक बेड पर दो तो किसी पर तीन तीन नवजात को एक साथ सोया देखा गया। ऐसे में नवजातों में संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मरीज के परिजन का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को नवजातों की जिंदगी से कोई मतलब नहीं है। एक साथ तीन बच्चे को रखने से वे एक दूसरे से संक्रमित हो सकते हैं। शिकायत करने पर कोई सुनता नहीं है। बच्चा ठीक नहीं है इसलिए यहां रखना मजबूरी है। बच्चों के लिए कुछ दवाएं बाहर से भी खरीद कर लाना पड़ता है।
अस्पताल के उपाधीक्षक का बयान
इस बाबत अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एन पी सिंह का कहना है कि वार्मर को करीब 10 बार मरम्मत करवाया गया, बार-बार खराब हो जाता है, पूरा बेड बदलने की योजना है। नवजात अधिक आ जाते हैं तो एक बेड पर दो को रखना मजबूरी है।
संवेदनशील विभाग के प्रति अस्पताल लापरवाह
यूं कह कि सब कुछ जानकर भी अस्पताल प्रबंधन लापरवाह है। जानकारी के मुताबिक अस्पताल की व्यवस्था बेहतर बनाए रखने के लिए तीन-तीन अस्पताल प्रबंधक हैं। बावजूद इसके उदासीनता साफ उजागर हो रही है। जानकारी के अनुसार एसएनसीयू में 12 नवजातों के लिए बेड उपलब्ध हैं। हाल में 6 वार्मर (बेड) खराब पड़े हुए हैं जो बाहर पड़ा हुआ है। बताया जाता है कि लगभग एक महीने से छह बेड खराब है। शिशु रोग विशेषज्ञ का कहना है कि चिकित्सकीय मानकों के अनुसार हर नवजात को अलग बेड पर रखा जाना चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा न हो। ड्यूटी पर तैनात नर्स से पूछे जाने पर बताया कि छह बेड ठीक है, बाकी सब खराब है, कब से खराब तो बताया गया कि पता नहीं।
नर्स के भरोसे हो रहा संचालित
यह विभाग केवल एक नर्स के भरोसे चल रही है। ड्यूटी में एक ही नर्स नजर आई। पूछने बताया कि ड्यूटी में एक ही नर्स रहती है, स्टाफ की कमी है। डॉक्टर सिर्फ राउंड लगते हैं। दिन तो दूर रात में भी इन नवजातों की जिंदगी नर्स के जिम्मे है। यहां किसी डॉक्टर की परमानेंट ड्यूटी नहीं होती है। रात में इमरजेंसी में जो चिकित्सक ड्यूटी में रहते हैं, वहीं आकर देखते हैं।
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