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महापर्व छठ आज नहाय-खाय के साथ आरंभ

महापर्व छठ आज नहाय-खाय के साथ आरंभ

संक्षेप: बेरमो में लोक आस्था का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय-खाय से शुरू हो गया है। छठव्रती अरवा चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी भगवान सूर्य को अर्पित कर पूजा करेंगी। महापर्व के दौरान कद्दू के भाव...

Sat, 25 Oct 2025 08:30 AMNewswrap हिन्दुस्तान, बोकारो
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बेरमो, प्रतिनिधि। लोक आस्था का महापर्व छठ‌ का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय-खाय के साथ आज शनिवार से आरंभ हो रहा है। छठव्रती नहाय-खाय के दिन नदी-तालाब या घर में स्नान के बाद अपनी लोक रीति के अनुसार अरवा चावल का भात, चना दाल और कद्दू की सब्जी भगवान सूर्य को अर्पित कर सपरिवार प्रसाद स्वरूप ग्रहण करेंगी और तन-मन की शुचिता के साथ छठ मइया के व्रत के लिए संकल्प लेंगी। वहीं कद्दू के भाव बेरमो के बाजारों में शुक्रवार को बढ़े रहे। महापर्व छठ की आस्था से मुख्य रूप से छठव्रतियां ही जुड़ी हैं और नारियों में यह संस्कार उनके नारीत्व में ही है।

यही कारण है कि साफ-सफाई से लेकर प्रसाद के लिए गेहूं-चावल बिनने व धोने-सुखाने के काम में छठव्रतियां जुट गई हैं। बेरमो विधायक कुमार जयमंगल की पत्नी अनुपमा सिंह ने अपने आवास में अपनी सास रानी सिंह और ननद के साथ गेहूं साफ करने के दौरान कहा कि छठ महापर्व मां की ममता, परिवार की खुशियां और लोक आस्था का प्रतीक है। 26 अक्तूबर को महापर्व के दूसरे दिन छठव्रती उपवास करते हुए संध्या काल में खरना पूजा (लोहंडा) करेंगी। अपनी लोक रीति के अनुसार दूध गुड़ से बनी खीर छठी मइया को अर्पित करने के बाद वह प्रसाद स्वयं ग्रहण करेंगी‌। फिर घर के लोग प्रसाद पाएंगे। इसके बाद व्रतियों के घर देर रात तक प्रसाद पाने का सिलसिला चलता रहेगा। 27 अक्तूबर को महापर्व के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दान किया जायेगा। जबकि 28 अक्टूबर, मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा।