रामायण कालीन केवट के आदर्शों, वीरता, भक्ति व सामाजिक योगदान को याद किया गया

Newswrap हिन्दुस्तान, बोकारो
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चलकरी में शुक्रवार को रामभक्त केवट की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। वक्ताओं ने केवट के आदर्शों और उनके सामाजिक योगदान की चर्चा की। केवट समाज की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला गया। सरकार से केवट समुदाय को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग की गई।

रामायण कालीन केवट के आदर्शों, वीरता, भक्ति व सामाजिक योगदान को याद किया गया

पेटरवार प्रखंड अंतर्गत चलकरी में शुक्रवार को रामभक्त केवट की जयंती श्रद्धा, उत्साह एवं सामाजिक चेतना के साथ मनाई गई। रामायण कालीन केवट के आदर्शों, वीरता, भक्ति और सामाजिक योगदान को याद किया।

केवट की पहचान

विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने कहा कि रामायण काल के केवट केवल एक नाविक नहीं, बल्कि सरल प्रेम, निर्भयता, वाक्चातुर्य, कर्मशीलता और सूझबूझ के अद्भुत प्रतीक थे। भगवान राम के प्रति उनकी निस्वार्थ भक्ति भारतीय संस्कृति में अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करती है। कहा कि ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से केवट समुदाय का उल्लेख विभिन्न ग्रंथों में अत्यंत सम्मान के साथ किया गया है। यह समुदाय भारत की मूल एवं प्राचीनतम जातियों में से एक माना जाता है।

समुदाय का योगदान

रामायण काल में केवट समाज की अपनी अलग सत्ता, संस्कृति और सामाजिक पहचान थी। कहा कि केवट केवल एक जाति नहीं, बल्कि चारों वर्णों से अलग पंचम वर्ण के रूप में भी जाना जाता था। कहा कि शृंगी ऋषि द्वारा राजा दशरथ का पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया गया था तथा उत्तर प्रदेश स्थित शृंगबेरपुर धाम में ही भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण को केवट ने गंगा पार कराया था।

महान आत्माओं का उल्लेख

उन्होंने महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वेदव्यास, भक्त प्रह्लाद, गुहाराज निषाद, वीर एकलव्य सहित अनेक विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान आत्माओं ने समुदाय को गौरवान्वित किया है। वहीं स्वतंत्रता आंदोलन में केवट समाज के योगदान को भी रेखांकित करते हुए कहा कि बंगाल की रानी रासमोनी केवट, छत्तीसगढ़ की वीरांगना बिलासा देवी केवट, क्रांतिवीर इन्दरू केवट, झिगरू केवट तथा जुब्बा साहनी जैसे अनेक सेनानियों ने देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान और बलिदान दिया।

सरकार से मांग

वक्ताओं ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि केवट समुदाय देश के सबसे प्राचीन मूल निवासियों में से है, इसलिए उन्हें आदिवासी सूची में शामिल किया जाना चाहिए। अध्यक्षता चुनिलाल केवट ने की। मनोज केवट, टेकलाल केवट व भूषण केवट ने कहा कि रामायण में वर्णित केवट का चरित्र प्रेम, निष्कपटता, सेवा भावना और वाक्पटुता का अनुपम उदाहरण है, जिससे सभी समाजों को प्रेरणा लेनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामभक्त केवट की जयंती कब मनाई गई?
रामभक्त केवट की जयंती शुक्रवार को मनाई गई।
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