एसडीओसीएम को वन विभाग से उत्खनन के लिए मिला 143.05 हेक्टेयर एकड़ भूमि
सीसीएल ने 27 फरवरी को एसडीओसीएम के लिए 143.05 हेक्टेयर वन भूमि का अपयोजन स्वीकृत किया। यह परियोजना 6-7 वर्ष तक निर्बाध कोयला उत्पादन करेगी, जिसमें 90 लाख मीट्रिक टन कोयला और 540 लाख क्यूबिक मीटर ओबी का निस्तारण होगा। आउटसोर्सिंग के लिए निविदा जल्द आएगी, जिससे कोयला श्रमिकों के लिए बेहतर उम्मीदें जागृत हुई हैं।

भंडारीदह, प्रतिनिधि। सीसीएल ढोरी प्रक्षेत्र अन्तर्गत एसडीओसीएम के लिए 143.05 हेक्टेयर वन भूमि का अपयोजन की स्वीकृति माइंस विस्तारीकरण एवं कोयला उत्खनन करने के लिए 27 फरवरी को आदेश निर्गत कर दिया गया है। यह सीसीएल के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। अब यह परियोजना 6-7 वर्ष तक निर्बाध रूप से कोयला उत्पादन कर राष्ट्र के लिए अहम योगदान होगा। 90 लाख मीट्रिक टन कोयला उत्पादन तथा 540 लाख क्यूबिक मीटर ओबी का निस्तारण होगा। मई से उत्पादन प्रारंभ हो जायेगा। इसके लिए बहुत जल्द आउटसोर्सिंग के लिए निविदा होगी। इस अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए सीसीएल मुख्यालय के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सहित ढोरी महाप्रबंधक रंजय सिंहा एवं परियोजना पदाधिकारी शैलेश प्रसाद, खान प्रबन्धक राजीव कुमार व नोडल आफिसर अच्युतानंद सहित अन्य अधिकारियों का सराहनीय योगदान रहा।
महाप्रबंधक व परियोजना पदाधिकारी ने कहा कि यह उपलब्धि और ऐतिहासिक पल है। उच्च अधिकारियों का सकारात्मक सहयोग रहा है। एसडीओसीएम का विगत 2-3 वर्ष से माइंस विस्तारीकरण के लिए इस जमीन का झारखंड सरकार एवं भारत सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए काफी मेहनत की गई। सरकार के सचिव द्वारा निर्गत पत्र में वर्णित है कि एसडीओसीएम खुली खदान में सन्निहित कुल 143.05 हेक्टेयर जमीन के नवीनीकरण से संबंधित वन भूमि प्रस्ताव में भारत सरकार द्वारा पूर्व में प्रदत्त वनभूमि अपयोजन की स्वीकृति का विस्तारीकरण कर सकेगा। यह आदेश ऐसे समय आया जब एसडीओसीएम विस्तारीकरण के लिए वर्षो से काफी परेशान था। माइंस कोयला उत्पादन के लिए जूझ रहा था। लेकिन आदेश मिलने के बाद एसडीओसीएम में मुरझाई लता फिर से हरी हो गई है। कोयला श्रमिको के लिए बेहतर उम्मीद फिर से जागृत हो गई।
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